जब मुस्लिम अभ्यर्थियों को हिजाब पहनने की छूट तो हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को चुन्नी लगाने कि क्यों नहीं….?

जब मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों को हिजाब पहनने की छूट है, तब हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को कम से कम चुन्नी लगाने की रियायत तो मिलनी ही चाहिए।23 व 24 जुलाई को होनी है रीट की परीक्षा।रीट परीक्षा में शामिल हो रही राजस्थान की सवा आठ लाख हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को राहत दिलवा सकते हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

एस0 पी0 मित्तल

राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (रीट) राजस्थान में 23 व 24 जुलाई को हो रही है। इस परीक्षा में करीब 16 लाख अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं। इनमें से करीब 8 लाख 25 हजार महिला अभ्यर्थी हैं। यानी महिला अभ्यर्थियों की संख्या पुरुष अभ्यर्थियों से ज्यादा है। राज्य सरकार के निर्देश पर रीट परीक्षा का आयोजन अजमेर स्थित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कर रहा है। परीक्षा की पूरी तैयारी राज्य सरकार के दिशा निर्देशों पर हो रही है। सरकार ने नकल रोकने के लिए जो दिशा निर्देश जारी किए हैं। उसके अनुसार महिला अभ्यर्थी शरीर पर किसी भी प्रकार का आभूषण नहीं पहन सकेंगी। यहां तक कि विवाहित महिला अभ्यर्थी को मंगल सूत्र भी हटाना होगा। इतना ही नहीं महिलाएं सिर और गले पर चुन्नी भी नहीं रख सकेंगी। आदि बाहां का कुर्ता या ब्लाउज पहनना अनिवार्य है।

भारत की सनातन संस्कृति में सिर और गला ढकने का कितना महत्व है यह सब जानते हैं, महिलाओं की लाज को ध्यान में रखते हुए ही मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों को परीक्षा में हिजाब पहनने की छूट दी जाती है ताकि उनका सिर और गला ढंका रहे। सवाल उठता है कि जब मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों को अपना सिर और गला ढंकने की छूट है, तब हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को क्यों नहीं है। क्या हिन्दू महिला अभ्यर्थियों की लाज का कोई महत्व नहीं है। जब मुस्लिम महिला अभ्यर्थियों को हिजाब पहनकर परीक्षा देने की छूट है, तब हिन्दू महिला अभ्यर्थियों की चुन्नी क्यों उतरवाई जा रही है। सवाल किसी धार्मिक परंपरा का नहीं है, सवाल महिला समानता का है। जब महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जा रहे हैं, तब महिला-महिला ने भी भेदभाव क्यों किया जा रहा है। इस भेदभाव को मिटाने में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रभावी पहल कर सकते हैं।

23 व 24 जुलाई को होने वाली रीट परीक्षा में हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को सिर और गले पर चुन्नी रखने की छूट के निर्देश तत्काल प्रभाव से दिलवाए जाने चाहिए। इससे महिलाओं के बीच भेदभाव भी समाप्त हो जाएगा। सीएम गहलोत महिलाओं की समस्याओं को लेकर हमेशा चिंतित रहते हैं। परीक्षा में हिन्दू महिला के सिर पर चुन्नी नहीं होना उनके लिए बड़ी समस्या है। यदि रीट परीक्षा में सीएम गहलोत हिन्दू महिला अभ्यर्थियों को चुन्नी की छूट दिलाएंगे तो देश भर में इस पहल का अनुसरण होगा। जो एजेंसियां प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करती है उनके अधिकारियों को भी यह समझना चाहिए कि हिन्दू महिला अभ्यर्थियों की पारिवारिक परंपराओं का भी ख्याल रखा जाए। हो सकता है कि अनेक महिला अभ्यर्थी अब जींस और टीशर्ट पहनने लगी हो, लेकिन अधिकांश महिला अभ्यर्थी सलवार कुर्ता ही पहनती हैं। सलवार कुर्ते पर चुन्नी का होना जरूरी है। रीट परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पुरुषों के मुकाबले उनकी संख्या ज्यादा है।