वैमनस्य बढ़ाने वाले संदेशों पर रोक लगाएं योगी जी-संजय सिंह

सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा के समर्थन में और आपसी वैमनस्य बढ़ाने वाले संदेशों पर रोक लगाएं योगी जीआज देश में जो भी हालात हैं उसका कारण नूपुर शर्मा है ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने माना है।उत्तर प्रदेश का विकास तभी हो पाएगा जब यहां के निवासी एकजुट होकर काम करेंगे और यह सरकार के प्रयास के बिना संभव नहीं।

लखनऊ। आज समाज में आपसी वैमनस्य बढ़ा है। हर व्यक्ति दूसरे की जाति या धर्म के प्रति वैमनस्य की दृष्टि से देखता है। नूपुर शर्मा की बयानबाजी के बाद समाज में तल्खी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर भी लागों द्वारा नूपुर शर्मा से दो कदम आगे नफरत बढ़ाने वाले संदेशों की बाढ़ सी आ गई जो कि एकजुट भारत और विकसित भारत की परिकल्पना को चोट पहुंचाने वाली है। अतः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से निवेदन है कि वह ऐसी बयानबाजी खासतौर से सोशल मीडिया पर इस तरह के संदेशों पर रोक लगाने का आदेश दें जिससे कि उत्तर प्रदेश एकजुट हो और भारत के विकास में उत्तर प्रदेश अपनी महती भूमिका निभा सके ।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि आज जो देश में हालात बने हैं उसमें नूपुर शर्मा की बयान बाजी एक प्रमुख कारण है ।कांग्रेस प्रवक्ता श्री संजय सिंह ने कहा कि नूपुर शर्मा की ही तरह समाज में बहुत लोग वैमनस्य बढ़ाने का काम कर रहे हैं उन पर भी लगाम लगाने की आवश्यकता है। खासतौर से सोशल मीडिया पर जिससे कि समाज में एकता और भाईचारा बढे़ और उत्तर प्रदेश विकसित प्रदेशों की गिनती में अग्रणी रहे ।

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर पर दिए विवादित बयान पर बेहद सख्त रुख दिखाया है। सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि नूपुर शर्मा के बयान भड़काने वाले थे। नूपुर शर्मा को टीवी पर माफी मांगनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नूपुर ने डिस्टर्ब करने वाला बयान दिया है। कोर्ट ने कहा कि नूपुर को कैमरे पर माफी मांगनी चाहिए थी। अदालत ने पैगंबर विवाद पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी पार्टी के प्रवक्ता होने से उसे कुछ भी कहने का लाइसेंस नहीं मिल जाता है। शुक्रवार को नूपुर शर्मा ने याचिका दायर कर शीर्ष अदालत में कहा था कि उनके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज सभी FIR दिल्ली ट्रांसफर की जाएं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया।