प्रदेश में ब्यूरोक्रेट्स चला रहे हैं सरकार- डा0 उमा शंकर पाण्डेय

उत्तर प्रदेश में विभागीय मंत्रियों के पास नहीं है अधिकार, ब्यूरोक्रेट्स चला रहे हैं सरकार उपमुख्यमंत्री को अपने ही विभाग के तबादलों की जानकारी न होना हास्यापद। शासन ने स्वयं के बनाये हुए तबादला नीति एवं डीएनबी प्रोग्राम के नियमों एवं शर्तों का किया उल्लंघन। फैकल्टी के अनियमित तबादलों से 40 से ज्यादा डीएनबी ट्रेनीज चिकित्सकों की डिग्री अधर में, कोर्स की मान्यता समाप्त होने का खतरा।

लखनऊ।
शासन ने स्वयं द्वारा जारी तबादला नीति का मखौल उड़ाते हुए अधिकारियों के माध्यम से नियमों एवं शर्तों की धज्जियां उड़ाई। इससे जहां एक तरफ व्यापक भ्रष्टाचार परिलक्षित होता है वहीं राजधानी के प्रतिष्ठित चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी हो जाने से दूर दराज के जनपदों से लखनऊ इलाज के लिए आने वाले मरीजों की जान खतरे में पड़ गयी है। राजधानी एवं   प्रदेश   के कई चिकित्सालयों में चिकित्सा के परास्नातक कोर्स की पढ़ाई कर रहे तमाम डीएनबी ट्रेनीज का भविष्य फैकेल्टीज के स्थानांतरण के बाद अंधकारमय होता दिख रहा है। डीएनबी की मान्यता की शर्तों के अनुसार फैकल्टी के कम होने की दशा में एनबीई नई दिल्ली द्वारा मान्यता समाप्त करने का प्रावधान है तथा ऐसे अस्पताल पुनः कोर्स प्राप्त करने की योग्यता खो देते हैं। इससे एमबीबीएस करने के बाद डीएनबी कर रहे चिकित्सक विशेषज्ञ नहीं बन पाते हैं। पूर्व में पहले भी ऐसा हो चुका है। लखनऊ के सिविल अस्पताल का उदाहरण ले तो यहां से फैकल्टी के छः विशेषज्ञ चिकित्सकों के तबादले हुए किन्तु उनकी जगह पर अस्पताल को एक भी विशेषज्ञ नहीं मिल पाया। बलरामपुर अस्पताल में डीएनबी कोर्स में कार्यरत सात विशेषज्ञों का तबादला हुआ जबकि उनकी जगह पर अस्पताल को महज एक विशेषज्ञ ही मिला। इसी तरह लोकबन्धु राज नारायण चिकित्सालय से तीन विशेषज्ञों के तबादले हुए लेकिन आया एक भी नहीं।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डा0 उमा शंकर पाण्डेय ने बताया कि 20 जून 2022 को अपर मुख्य सचिव श्री अमित मोहन प्रसाद द्वारा जारी आदेश के अनुसार विशेष  परिस्थतियों के अलावा डीएनबी कोर्स की फैक्लिटी को बदला नहीं जा सकता। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर विभिन्न चिकित्सालयों में तबादले किये गये और रिक्त पदों को भरा भी नहीं गया। इससे एक तरफ जहां पीजी कर रहे चिकित्सकों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है वहीं गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जान भी खतरे में पड़ गयी है।

डा0 पाण्डेय ने कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ की असफलताओं का खुलासा स्वयं उनके उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक कर रहे हैं। योगी सरकार केमंत्रियों के पास न कोई अधिकार है न ही विभाग के बारे में विशेष जानकारी। विभागीय अधिकारी, विभागीय मंत्रियों के बजाय ‘‘कहीं और से’’ आदेश लेकर कार्य कर  रहे  हैं यह लोकतांत्रिक ढांचे के सर्वथा विपरीत है। ऐसी कार्य संस्कृति सरकार के भ्रष्टाचार में डूबे होने का प्रतीक होती है।  कोरोना काल के दौरान हुई अव्यवस्था एवं दुदर्शा को लेकर योगी एवं मोदी सरकार के तमाम मंत्रियों, विधायकों, एवं सांसदों ने मुख्यमंत्री योगी की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाये थे, जिसमें श्री ब्रजेश पाठक ने भी पत्र के माध्यम से सवाल खड़े किये थे। हाल ही में उनके द्वारा छापेमारी के दौरान 16 करोड़ रूपये की लागत की एक्सपायर्ड दवाईयों के खुलासे से स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त आराजकता के माहौल का सच सामने आया था। अब स्वास्थ्य विभाग में किये गये तबादलों के विषय में उपमुख्यमंत्री द्वारा अनभिज्ञता व्यक्त करने और उनके द्वारा अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को इस सन्दर्भ में पत्र लिख कर स्पष्टीकरण और विवरण मांगे जाने की कार्यवाही योगी सरकार के मंत्रियों एवं अधिकारियों की आपसी लड़ाई को दर्शाता है साथ ही साथ सरकार के आकण्ठ भ्रष्टाचार में डूबे होने का प्रमाण प्रस्तुत करता है। इस कार्य संस्कृति के कारण ही प्रदेष की स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।

डा0 उमा शंकर पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ से मांग करते हुए कहा कि तबादला नीति का पूर्णतया पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन परिश्रम के बाद डीएनबी कोर्स में प्रवेश पाने वाले चिकित्सकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए तत्काल फैकल्टी उपलब्ध करायी जाये जिससे डीएनबी कोर्स की मान्यता और 40 से अधिक चिकित्सकों का भविष्य भी सुरक्षित रहे। इससे प्रदेश को नये विशेषज्ञ चिकित्सक भी मिलेंगे जिससे प्रदेश के लोगों का भला होगा। राजधानी सहित प्रदेश के सभी प्रतिष्ठित चिकित्सालयों में तत्काल विशेषज्ञों की कमी को दूर किया जाये।