बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?

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बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?
बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?

गंगा और रामगंगा नदी के बीच बसा बदायूं संसदीय क्षेत्र छोटे सरकार और बड़े सरकार की प्रसिद्ध दरगाह की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह क्षेत्र सपा का गढ़ माना जाता था। वर्ष 1996 से लेकर 2014 तक इस सीट पर सपा का ही कब्जा था लेकिन 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने इस वर्चस्व को तोड़ा। फिलहाल इस सीट से भाजपा की संघमित्रा मोर्या सांसद हैं। इस सीट पर सपा से लगातार चार बार सलीम इकबाल शेरवानी चुनाव जीते थे। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का यहां के लोगों से व्यक्तिगत जुड़ाव रहा है। गंगा और रामगंगा की कटरी डाकुओं की शरणस्थली रही है, लेकिन अब डाकुओं का सफाया हो चुका है। बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?

लोकसभा चुनाव में टिकट वितरण में सबसे आगे चल रही समाजवादी पार्टी का टिकट बदलने के बाद चुनावी गतिविधियां थम गई हैं। टिकट में बदलाव हुए पंद्रह दिन गुजर चुके हैं, लेकिन प्रचार अब तक शुरू नहीं हो सका है। कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।कयास यह भी लगाए जाने लगे हैं कि दोबारा टिकट में बदलाव हो सकता है। पार्टी धर्मेंद्र यादव को वापस बुला सकती है। हालांकि पार्टी के जिम्मेदार अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान जल्द ही किया जा सकता है।

सपा का गढ़ है बदायूं

बदायूं जिले को सपा का गढ़ कहा जाता है। पिछले चुनाव को छोड़ दें तो उसके पहले लगातार छह बार सपा उम्मीदवार निर्वाचित होते रहे हैं। 2019 के चुनाव में भी हार-जीत का अंतर 18 हजार वोट ही रहे। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में सपा में अच्छी वापसी की और जिले की छह में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की।

धर्मेंद्र यादव को सुरक्षित मानी जाने वाली सीट कन्नौज या आजमगढ़ से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। सियासी जानकार भी मानते हैं कि कन्नौज और आजमगढ़ सीट समाजवादी पार्टी के लिए मजबूत गढ़ रही है। 1999 से लेकर 2019 तक इस सीट पर मुलायम सिंह अखिलेश यादव और डिंपल यादव सांसद रह चुके हैं। 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने यह सीट समाजवादी पार्टी से छीन ली थी। आजमगढ़ सीट पर भी मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सांसद रह चुके हैं। हालांकि उपचुनाव में अखिलेश यादव के भाई धर्मेंद्र यादव यहां से भारतीय जनता पार्टी से चुनाव हार गए थे। वावजूद इसके सियासी गलियारों में कहां यही जा रहा है कि कन्नौज और आजमगढ़ समाजवादी पार्टी के लिए पुराने गढ़ और मजबूत सीट है। इसलिए यहां पर धर्मेंद्र यादव या कोई और यादव परिवार से मजबूत प्रत्याशी उतारा जा सकता है।

धर्मेंद्र यादव और शिवपाल यादव को लेकर फंसा पेंच

लोकसभा चुनाव को लेकर भी सपा ने सबसे पहले पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को टिकट देकर मैदान में उतार दिया था, लेकिन पंद्रह दिन पहले अचानक सपा ने इनका टिकट निरस्त कर पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतार दिया। इसके बाद भाजपा में भी खलबली मच गई।

सपा में बनी असमंजस की स्थिति

टिकट बदलने के बाद यहां न तो शिवपाल सिंह यादव पहुंचे हैं और न ही धर्मेंद्र यादव आए हैं। इससे कार्यकर्ताओं में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। इसके पीछे की मुख्य वजह पार्टी के ही सलीम इकबाल शेरवानी और आबिद रजा के बगावती तेवर को माना जा रहा है। यह लोग कल से सेकुलर सम्मेलन भी आरंभ कर रहे हैं। सपा कार्यकर्ता पार्टी प्रत्याशी अथवा किसी बड़े नेता के आने का इंतजार कर रहे हैं।

बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?
शिवपाल यादव

बदायूं अब समाजवादी पार्टी के लिए उतनी मजबूत सीट नहीं रही। उनका कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां पर विजय हासिल की। समाजवादी पार्टी के बड़े नेता सलीम इकबाल शेरवानी के साथ मुस्लिम और यादव के कांबिनेशन से पार्टी मजबूती से आगे की सियासी राह पर बढ़ रही थी। लेकिन शेरवानी के पार्टी छोड़ने से बदायूं की पूरी सियासी गणित बिगड़ गई। वह कहते हैं कि इन्हीं सियासी समीकरणों को देखकर कयास लगाए जा रहे हैं कि बदायूं की सीट समाजवादी पार्टी के लिए अब उतनी मजबूत नहीं रही। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि शिवपाल यादव को उस लोकसभा सीट पर मैदान में उतारा गया है जो सियासी गुणा गणित के लिहाज से फिलहाल कमजोर हो चुकी है। हालांकि समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि शिवपाल यादव का जमीनी नेटवर्क मुलायम सिंह यादव की तरह ही मजबूत है। बदायूं की विपरीत सियासी परिस्थितियों में भी शिवपाल यादव पार्टी के बड़े खेवनहार हो सकते हैं। इसलिए उनको उनको बदायूं से चुनावी मैदान में उतारा गया है।शिवपाल यादव ने कहा कि पार्टी ने उन्हें बदायूं लोकसभा से प्रत्याशी बनाया है। पार्टी का जो आदेश है वे उसे मानेंगे। रही बात धर्मेंद्र यादव की तो धर्मेंद्र यादव भी लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। उनका नाम भी जल्द ही घोषित हो जाएगा। भाजपा सरकार में महंगाई, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकार रोजाना झूठ पर झूठ बोल रही है। प्रदेश के युवाओं, किसानों व मजदूरों को परेशान किया जा रहा है।

भाजपा ने नहीं उतारा बदायूं से प्रत्याशी

भाजपा ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है, लेकिन बदायूं सीट पर अभी तक किसी का टिकट घोषित नहीं किया गया है। सपा ने चुनाव प्रचार पहले ही शुरू कर दिया था, लेकिन टिकट बदलने के बाद राजनीतिक गलियारे में चुनावी हलचल थम सी गई है। बदायूं लोकसभा पर सस्पेंस क्यों..?