व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सदैव सकारात्मक भाव रखें-योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने गोरक्षनाथ मन्दिर, जनपद गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 53वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 8वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित। सप्त दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ के विश्राम सत्र को सम्बोधित किया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हर परिस्थिति में सत्य के प्रति आग्रह रखने वाले हैं। भगवान श्रीराम का जीवन हम सभी को नकारात्मकता से दूर रहकर सत्य की राह पर चलते हुए विषम से विषम परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। सनातन धर्म परम्परा में भगवान श्रीराम के बगैर आस्थावान जनता का कार्य हो ही नहीं सकता। हम सभी को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सदैव आस्था के साथ सकारात्मक भाव रखना चाहिए। आज पूरा देश आस्था एवं सकारात्मक भावना के साथ प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर निर्माण से जुड़ा हुआ।

लखनऊ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम हर परिस्थिति में सत्य के प्रति आग्रह रखने वाले हैं। भगवान श्रीराम का जीवन हम सभी को नकारात्मकता से दूर रहकर सत्य की राह पर चलते हुए विषम से विषम परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। उनके जीवन दर्शन के माध्यम से समूचे समाज का मार्गदर्शन करने वाली श्रीराम कथा का श्रवण बहुत ही सौभाग्य की बात है। जनपद गोरखपुर में गोरक्षनाथ मन्दिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 53वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 8वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ के विश्राम सत्र के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म परम्परा में भगवान श्रीराम के बगैर आस्थावान जनता का कार्य हो ही नहीं सकता। आस्था सामूहिक हो तो उसका विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। भगवान श्रीराम की कथा का हर एक प्रसंग सभी आस्थावानों को याद है। फिर भी हम सभी इस कथा के साथ अत्यन्त सहृदयता से जुड़कर उसमे वर्णित हर घटना अपने आस-पास महसूस करते हैं और अंततः सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।


मुख्यमंत्री ने श्रीराम कथा से सकारात्मकता की सीख लेने का आह्वान करते हुए कहा कि नकारात्मक सोच का परिणाम कभी सकारात्मक नहीं हो सकता। हम सभी को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में सदैव आस्था के साथ सकारात्मक भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश आस्था एवं सकारात्मक भावना के साथ प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर निर्माण से जुड़ा हुआ है। यह पूरी दुनिया के लिए कौतूहल का विषय है। श्रीराम का जन्म कब हुआ, इतिहासकार इसकी गणना करने में सफल ही नहीं हो पा रहे थे। यही नहीं इसमें मिथक भी जोड़ने का प्रयास किया गया, किन्तु अंततः सत्य की जीत हुई। सत्य का आग्रह और सत्य के मार्ग पर चलना ही भारत की आस्था है और सनातन धर्म की परम्परा एवं विशेषता भी। इसी परम्परा के अनुरूप राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वाधीनता आन्दोलन में पहली शर्त सत्याग्रह रखी थी। मुख्यमंत्री जी ने सभी लोगों के लिए श्रीराम कथा के फलदायी एवं मंगलमयदायी होने की कामना की।


    सात दिन तक श्रीराम कथा का रसपान व्यासपीठ पर विराजमान जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज (पीठाधीश्वर, अशर्फी भवन अयोध्या) ने कराया। कथा के आखिरी दिन उन्होंने रामराज्य के स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि रामायण काल के रामराज्य को वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी साकार कर रहे हैं। उनके राज में आमजन प्रसन्न हैं, तो दुष्ट व अपराधी दुखी और भयभीत।इस अवसर पर अलवर के सांसद महंत बालकनाथ, दिगम्बर अखाड़ा (अयोध्या) के महंत सुरेश दास, कालिका मन्दिर (नई दिल्ली) के महंत सुरेन्द्रनाथ,नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य, गोरक्षनाथ मन्दिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविन्द्रदास सहित बड़ी संख्या में संतजन, यजमान व श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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