लखनऊ विश्वविद्यालय में फाइलेरियारोधी दवा का सेवन

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लखनऊ विश्वविद्यालय में फाइलेरियारोधी दवा का सेवन
लखनऊ विश्वविद्यालय में फाइलेरियारोधी दवा का सेवन

लखनऊ विश्वविद्यालय में 400 लोगों ने किया फाइलेरियारोधी दवा का सेवन।

लखनऊ। जनपद में चल रहे सर्वजन दवा सेवन(आईडीए) अभियान के क्रम में बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय स्थित आरोग्य भवन में में फाइलेरियारोधी दवा सेवन करवाने के लिए बूथ लगाया गया जिसका उद्घाटन कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार ने साल 2027 तक फाइलेरिया के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इस क्रम में सभी को फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करना चाहिए जिससे कि तय समयानुसार जनपद फाइलेरिया मुक्त हो सके। जिला मलेरिया अधिकारी डा. रितु श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्य परिसर सहित सीतापुर रोड स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय के द्वितीय परिसर में भी फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करवाने के लिए बूथ लगाया गया। दोनों ही जगह जिसमें स्टाफ और विद्यार्थियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और कुल 400 लोगों ने फाइलेरियारोधी दवा का सेवन किया। इसके साथ ही यहाँ पर लोगों को यह जानकारी भी दी गई कि आईडीए अभियान के तहत लगातार तीन साल तक साल में एक बार फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करने से फाइलेरिया से बचा जा सकता है।

इस अभियान में कुल 54.21 लाख की जनसंख्या को फाइलेरियारोधी दवा खिलाने का लक्ष्य है। अभी तक विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों,अपार्टमेंट, कार्यालयों, ईंट भट्टों, में बूथ लगाकर दवा खिलाई जा चुकी है। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर भी लोगों को रोस्टर के अनुसार फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करवा रही हैं।इस अभियान में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सेवक लोगों को दवा सेवन करवा रहे हैं। इसके साथ ही पेशेंट नेटवर्क के सदस्य भी पाँच ब्लॉक में आशा कार्यकर्ता की दवा सेवन करवाने में मदद कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित स्वयं सेवी संस्थाएं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफॉर), पाथ और पीसीआई का भी इस अभियान में सहयोग कर रही हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी ने जनसमुदाय से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग करें और फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करें। दवा सेवन के बाद उल्टी, जी मिचलाना, सिर दर्द की समस्या होती है तो इससे डरें नहीं। यह थोड़ी देर में स्वतः ठीक हो जाता है और इसका मतलब है कि शरीर में फाइलेरिया के परजीवी थे और दवा सेवन के बाद उनके मरने के परिणाम स्वरूप यह प्रतिक्रिया हुई है। यह व्यक्ति के लिए सकारात्मक प्रभाव है कि उसे पता चल गया है कि शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद थे जो कि दवा सेवन के बाद शरीर से बाहर निकल गए हैं।इस मौके पर सीएचसी अलीगंज की स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शालिनी चौधरी, सीएचसी का स्टाफ, विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी अन्य स्टाफ, सहयोगी संस्था पाथ और पीसीआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय में फाइलेरियारोधी दवा का सेवन