जेल मुख्यालय में चल रहा गोरखधंधा

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मणिपुर से हो रहा बरेली जेलों का नियंत्रण..!
मणिपुर से हो रहा बरेली जेलों का नियंत्रण..!

अब प्रधान सहायक करेगा जेल का ऑडिट! वित्त नियंत्रक के आदेश से बाबू संवर्ग में मची खलबली। जेल मुख्यालय में चल रहा गोरखधंधा। जेल मुख्यालय में चल रहा गोरखधंधा

आर.के.यादव

लखनऊ। प्रदेश कारागार मुख्यालय में सब गोलमाल है। मुख्यालय के वित्त नियंत्रक ने एक प्रधान सहायक से जेल का ऑडिट कराए जाने का फरमान जारी कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि पिछले दिनों विभागाध्यक्ष ने इस बाबू का शिकायत मिलने पर स्थानांतरण अन्यत्र विभाग में किया था। इस स्थानांतरण के बाद भी वित्त नियंत्रक ने बाबू को ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंप दी। उधर विभाग के बाबूओं में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कयास लगाए जा रहे है कि कमाई के चलते यह फरमान जारी किया गया है।


जेल मुख्यालय में दर्जनो की संख्या में बाबू लंबे समय से एक ही पटल पर जमे हुए थे। मामला सुर्खियों में आने के बाद विभागाध्यक्ष हरकत में आए। बीते दिनों महानिरीक्षक कारागार ने करीब आधा दर्जन से अधिक बाबूओं का पटल परिवर्तन किया। इसके तहत बजट अनुभाग में तैनात प्रधान सहायक सरवन वर्मा का पटल परिवर्तन कर उसको सामान्य अनुभाग एक में भेजा गया। इस अनुभाग में बंदियों के जेल स्थानांतरण, चिकित्सा व्यवस्था, पैराल इत्यादि के काम होते हैं। सूत्रों का कहना है कि पहले तो पटल परिवर्तन के बाद प्रधान सहायक सरवन वर्मा ने प्रभार ही नहीं संभाला। विभागाध्यक्ष की सख्ती के बाद प्रभार ग्रहण किया। यह मामला अभी चल ही रहा था वित्त नियंत्रक ने सामान्य अनुभाग में तैनात प्रधान सहायक सरवन वर्मा को जेल का ऑडिट करने में लगाने का आदेश जारी कर दिया।

वित्त नियंत्रक को नहीं कोई अधिकार

वित्त नियंत्रक का किसी अन्य अनुभाग से बाबू को लेने का अधिकार ही नहीं प्राप्त है। विभागीय जानकारों के मुताबिक जेल मुख्यालय में किसी भी अनुभाग में तैनात कर्मचारी को लेने के लिए विभागाध्यक्ष की संस्तुति लेना आवश्यक होता है। आईजी जेल की संस्तुति के बगैर कोई भी अधिकारी किसी कर्मचारी को अपने साथ नहीं ले सकता है। पूर्व में प्रधान सहायक सरवन वर्मा बजट अनुभााग में तैनात था। उसे समय वित्त नियंत्रक मातहत होने की वजह से उससे अतिरिक्त काम ले सकता था। वर्तमान समय में प्रधान सहायक सामान्य अनुभाग एक में तैनात है। इससे ऑडिट कराना पूरी तरह से अनुचित है।


बीती 23 नवंबर को मुख्यालय के वित्त नियंत्रक चंद्रभूषण पांडे ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि कानपुर देहात जिला जेल में फैक्ट्री, गल्ला गोदाम, विविध वस्तु गोदाम एवं निर्माण का ऑडिट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूत्रों का कहना है कि जेलों में बेतरतीब तरीके से हो रही खरीद-फरोख्त में हुई धांधली और लाखों रुपए के गोलमाल को रफादफा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रधान सहायक के ऑडिट करने का मामला बाबू संवर्ग के अधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। उधर इस संबंध में जब पुलिस महानिदेशक/महानिरीक्षक कारागार एसएन साबत से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जानकारी करने के बाद मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जेल मुख्यालय में चल रहा गोरखधंधा