June 21, 2021

Nishpaksh Dastak

Nishpaksh Dastak

क्या होता है, लिव इन रिलेशनशिप

रिलेशनशिप क्या हैं क्या इसे ही प्यार कहते है..? ये समझने से पहले हमे ये समझना होगा रिलेशन क्या है यानि कि सम्बन्ध क्या हैं तो चलिए समझते है रिलेशन का मतलब है हमारे सगे सम्बन्धी जिन्हे हम जानते हैं यह कोई भी हो सकता हैं तुमहारा दोस्त, पड़ोसी, भाई माँ ,गर्लफ्रेंड यहाँ तक कि तुम्हारा दुश्मन भी हो सकता है भले ही आप उसे बिल्कुल पसंद ना करें हां बस यह कह सकते हैं कि आपका और आपके दुश्मन का अच्छा संबंध नहीं है पर संबंध तो है। अब हम बात करते हैं रिलेशनशिप कि यह भी सम्बन्ध होता हैं पर इसे हम लव के सन्दर्भ में लेते हैं वैसे तो लव यानि की रिलेशनशिप कई प्रकार का होता है लेकिन इनमें से कुछ ज्यादातर यूज होने वाले रिलेशनशिप के बारे में हम बात करने वाले हैं। बच्चे के जन्म लेने से पहले से ही उसके माँ-बाप उसे प्यार करने लगते है।

09 महीने अपनी कोख में रखकर 9000 तकलीफ सहने के बाद भी वह अपने बच्चे को सीने से लगाकर रखती है, वह और कोई नही बल्कि माँ होत्ती है। अपने बच्चे के लिए सुबह जागकर रोजाना काम पर जाने वाले, हिम्मत हो या न हो लेकिन अपने बच्चे का अच्छा भविष्य बनाने के लिए मेहनत करने वाले बाप होता है। बचपन की गलती होने पर समझाते भी माँ-बाप ही है इनका प्यार है ही इतना अनमोल की की कभी भुलाया नही जा सकता न ही इस प्यार का कोई मोल लगाया जा सकता। इनके अलावा भी भाई- बहन, दादा-दादी, मामा-मामी, नाना-नानी, चाचा-चाची या आदि कोई भी रिश्ता ही क्यों न हो होता हर बच्चे के लिए ही अनमोल और प्यारा होता है, फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की। लेकिन आज के युवा पीढ़ी के दौर में लिव इन रिलेशनशिप इन रिश्तो पर भरी पड़ता दिखा दे रहा है।

लिव इन रिश्ते की कानूनी मान्यता के अनुसार दोनों पार्टनर के बीच यौन संबंध की पूरी आजादी है। अगर रिश्ते में रहने के दौरान बच्चा पैदा होता है, तो रिश्ते को लिव इन माना जाएगा। यौन संबंध बनाने और बच्चे पैदा करना दोनों की इच्छा पर निर्भर करता है।

कोई भी बच्चा जब तक छोटा होता है, वह घर में किसी से कोई भी बात नही छुपाते लेकिन जैसे ही बच्चे 9वीं कक्षा में आते है, उनके दिमाग का विकास हर तरीके से होने लगता ही, साथ ही होर्मओंअल चेंजेस का भी असर दिखाई देने लगता है। किशोरावस्था मे नए दोस्त बनाते है, नई संगती में रहना पसंद करने लगते है। जहा दोस्तों के बीच हजारो बाते होती है, जो घर पर नही बताई जा सकती। इसके अलवा भी इन्टरनेट और मोबाइल फ़ोन हर किशोरों की पहली जरूरत बन गयी है। धीरे-धीरे लड़के और लडकिया बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के चक्कर में पड़ने लगते है, जिनसे वह अपने मन की, अपने दिल की हर एक बात शेयर कर सके। हालाँकि यह बात दोस्तों से भी की जा सकते है, लेकिन दोस्ती से भी ऊपर का रिश्ते मानते है बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड के रिलेशनशिप को, और इसी को प्यार का नाम दे दिया जाता है।

लिव इन रिलेशनशिप में जिंदगी भर रहें। मगर, किसी रिश्ते को लंबे समय तक टिकाने के लिए उसके नियम-कानून और कुछ व्यवहारिक बातों को जानने के लिए कम से कम दो-चार मिनट देना चाहिए।लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए आपका एक्साइटमेंट समझ सकते हैं। आपका लिव इन में रहने का फैसला कितना सही या गलत हो सकता है ये तो कोई नहीं बता सकेगा। अगर कोई केवल मौज-मस्ती के हिसाब से लिव इन रिलेशनशिप का चयन कर रहा है तो उनको संभलने की जरुरत है।आप भले ही लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए शादी नहीं करते लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप जब दिल किया रह लिए और निकल पड़े।

अकसर स्कूल के बाद कॉलेज लाइफ में यह देखा जाता है की, माँ-बाप का ध्यान हालका सा अपने बच्चो की ओर कम होने लगता है। या ये भी कहे सकते है कि, कॉलेज लाइफ में लड़के और लडकियों में मचुरिटी का वास पूर्ण तरीके से हो जाता है। और वह अपने कैरियर की तरफ पहला कदम ले रहे होते है।जिसे देख पेरेंट्स निश्चिंत हो जाते है। अधिकतर लड़के – लडकिया अपने कैरियर पर फोकस के साथ साथ अपने रिलेशनशिप पर भी पूरा ध्यान देते है। रिलेशनशिप भी आज के समय में दो तरीके की हो गयी है। एक वो है जिसे हकीकत में प्यार कहा जाता है तो दूसरा सिर्फ जिस्म की नुमाइश होता है।