मां

आर्यावर्ती सरोज “आर्या”
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

मां

शत् शत् नमन
तेरी चरण कमल में
ईश्वर के जो,सुने थे
सब गुण मुझमें पाया मां
शत् शत् नमन……
बन ब्रह्मा तुमने जन्म दिया
विष्णु बनकर पालन किया
शिव त्रिशूल बन
मेरी जीवन रक्षिणी
तुम्हीं बनी हो मां
मेरा जीवन तुझसे ही है
तुझसे ही पहचान है मां
तू! ना होती तो;
मैं! भी ना होती;
फिर, मैं कैसे बनती मां?
तू पूज्यनीय,तू वंदनीय,
तू अती रमणीय है मां।
आंचल जिसका धरती हो
हो, विशाल आकाश हृदय,
वह तुम हो मां! वह तुम हो।
शत् शत् नमन
तेरी चरण कमल में मां।