समाजवादी नेता शरद यादव नहीं रहे

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समाजवादी नेता शरद यादव नहीं रहे

देश के समाजवादी नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव नहीं रहे।

लखनऊ। जनता दल यूनाईटेड के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव का निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। यह जानकारी शरद यादव की बेटी शुभाषिनी यादव ने ट्वीट कर दी है।देश के बड़े समाजवादी नेता का निधन हो गया। वे बीमार चल रहे थे और उनका इलाज गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा था। शरद यादव के निधन से पूरे राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। शरद यादव की बेटी शुभाषिनी यादव ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘पापा नहीं रहे।’ शरद यादव के दामाद राज कमल राव ने कहा, उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था, हम उन्हें अस्पताल लेकर गए। वहां पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्हें किडनी की समस्या थी और डायलिसिस पर थे।

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गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने बयान जारी करते हुए कहा, शरद यादव को बेहोशी की हालत में गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में इमरजेंसी में लाया गया था। जांच करने पर उनके शरीर में कोई हलचल नहीं थी और रक्तचाप भी मापने योग्य नहीं था। एसीएलएस प्रोटोकॉल के तहत उनका सीपीआर किया गया।तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें सामान्य नहीं किया जा सका और रात 10 बजकर 19 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हम उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहते हैं। उनके पार्थिव शरीर को मध्य प्रदेश में उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।

समाजवादी नेता शरद यादव नहीं रहे

‘पापा नहीं रहे।’ इन्हीं शब्दों के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री व देश के बड़े समाजवादी राजनीतिज्ञों में से एक शरद यादव के निधन की खबर सबसे पहले उनकी बेटी सुभाषिनी यादव की तरफ से ट्वीट करके दी गई। गुरुवार की रात 10.48 पर किए गए इस ट्वीट के बाद ही देश ने 75 वर्ष की आयु में शरद यादव के देहावसान के बारे में जाना। सुभाषिणी के ट्विटर हैंडल को देखें तो अपने परिचय के साथ उन्होंने अपने पिता के कथन- ”राज सच्ची बोली से चलता है, गोली से नहीं” को सबसे टॉप पर रखा है। जाहिर है यह शरद यादव और सुभाषिणी यादव की बॉन्डिंग को भी बताता है।अब जदयू के पूर्व अध्यक्ष रह चुके शरद यादव के निधन के साथ ही उनकी विरासत को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

शरद यादव का राजनीतिक कद इतना ऊंचा था कि जब वे बोलते थे तो पूरा देश सुनता था। मंत्री रहे हों या विपक्ष के सांसद, उनके सामने कभी कोई ऐसा सवाल नहीं आया जिसका जवाब उन्हें नहीं सूझा हो।शरद यादव जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके थे। उनका नाम देश के बड़े समाजवादी नेताओं में शुमार किया जाता था।शरद यादव का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद के बंदाई गांव में किसान परिवार में हुआ था। किसान के घर जन्मे शरद पढ़ने लिखने में काफी तेज थे।

छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले शरद यादव ने बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुकाम हासिल किया था। शरद यादव ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और फिर बिहार में अपना राजनीतिक परचम लहराया था। नीतीश कुमार से हुए विवाद के बाद उन्होंने जदयू का साथ छोड़ दिया था। वो बिहार की मधेपुरा सीट से कई बार सांसद रह चुके थे।
वे डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से बहुत प्रेरित थे। उन्हीं से प्रेरणा पाकर शरद यादव ने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया था। इतना ही नहीं, वे MISA के तहत 1969-70, 1972 और 1975 में जेल भी गए।

सक्रिय राजनीति में शरद यादव ने साल 1974 में कदम रखा था तब वे वे पहली बार जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। वे कुल सात बार यूपी एमपी और बिहार से चुनकर लोकसभा पहुंचे थे। उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे कई सरकारों में केंद्रीय मंत्री भी रहे। शरद यादव ने अपनी खुद की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल शुरू की थी। मार्च 2020 में उन्होंने लालू यादव के संगठन राजद में विलय कर लिया