शिवखोड़ी गुफा जिसमें भगवान शिव पूरे परिवार के साथ हैं विराजमान

राजू यादव

शिवखोडी धाम जम्मू कश्मीर में ही है कहते है शिव के इस धाम में शिव के दर्शन मात्र से सारे कार्य पूर्ण होते है और साथ ही साथ सभी देवी देवताओ का आशीर्वाद भी मिलता है। शिवखोड़ी ऐसी अलौकिक और अद्भुत गुफा है जिसमें भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ वास करते हैं और मान्यता है कि इसी गुफा का रास्ता सीधा स्वर्ग लोक की और जाता है क्योंकि यहाँ स्वर्ग लोक की ओर जाने वाली सीढ़ियां भी बनी हुई हैं।

म्मू-कश्मीर स्थित भगवान शिव के विश्व प्रसिद्ध धाम अमरनाथ से तो आप भलीभांति परिचित होंगे ही लेकिन यहाँ भगवान शिव का एक और प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है जिसका नाम है शिवखोड़ी धाम। मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान के दर्शन किये तो आपका स्वर्ग जाना तय है। शिवखोड़ी एक ऐसी अलौकिक और अद्भुत गुफा है जिसमें भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ वास करते हैं और मान्यता है कि इसी गुफा का रास्ता सीधा स्वर्ग लोक की और जाता है क्योंकि यहाँ स्वर्ग लोक की ओर जाने वाली सीढ़ियां भी बनी हुई हैं और साथ ही इस गुफा का दूसरा छोर सीधा अमरनाथ गुफा की ओर निकलता है।इस गुफा में भगवान के अर्ध नारिश्वर रूप के दर्शन होते हैं, भगवान शिव की इस गुफा का नाम है शिव खोड़ी जोकि जम्मू से करीब 90 किलोमीटर दूर है जो जम्मू संभाग के रियासी जिले में स्थित है। इस गुफा में प्राकृतिक रूप से शिवलिंग बना हुआ है जिसकी ऊंचाई करीब साढ़े तीन से 4 फीट के बीच है, इतनी ही नहीं इस शिवलिंग के ऊपर अमृत की बूंदें यानि गंगा जल की बूंदें लगातार टपकती हैं। प्राचीन कथाओं के अनुसार पहले इस शिवलिंग पर दूध की धारा लगातार गिरती थी क्योंकि कामधेनु गाय के थन भी इन शिवलिंग के ऊपर ही बने हुए हैं। कथाओं के अनुसार इस शिव गुफा में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ वास करते हैं तो वहीं 33 करोड़ देवी देवता भी इस गुफा वास करते हैं।

राज्य के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में शिवखोड़ी धाम की विशिष्ट स्थान है। विश्व प्रसिद्ध बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा की भांति लाखों शिवभक्त प्रतिवर्ष यहां आकर स्वयं को धन्य समझते हैं। माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा से करीब 80 किमी दूर स्थित रनसू गांव से तीन किमी दूर भगवान शिव की प्राकृतिक गुफा है। रनसू गांव से गुफा तक तीन किमी लंबे रास्ते के मनोहारी दृश्य व प्राकृतिक सौंदर्य भक्तों को सुखद अनुभूति कराते हैं। प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। रनसू से गुफा तक का तीन किमी लंबा रास्ता भोले बाबा के जयकारों से गूंज रहा है। रास्ते में कदम-कदम पर पौराणिक मान्यताओं को समेटे शिवखोड़ी पहुंचने के लिए जम्मू और कटड़ा दोनों जगहों से छोटे-बड़े वाहनों के साधन उपलब्ध हैं। रनसू पहुंचने के बाद यात्रियों को दर्शन कराने के लिए गाइड ओर पंडित दोनों मिलते हैं, जो शिवखोड़ी की पौराणिक मान्यता के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाते हैं। यात्रा शुरू करते ही सबसे पहले शिवगंगा के दर्शन किए जाते हैं। इससे कुछ दूर आगे चलते ही अंजली कुंड के दर्शन होते हैं। मान्यत है कि अंजली कुंड में नंदी (बैल) ने पानी पीया था, यहां नंदी के पैरों के बने चिन्ह के दर्शन किए जाते हैं। लगभग 12 फुट गहरे कुंड में रंग-बिरंगी मछलियों को आने वाले यात्री आटा डालकर पुण्य कमाते हैं।

जम्मू में श्री माता वैष्णो देवी के बाद दूसरे सबसे बड़े धार्मिक स्थान श्री शिवखोड़ी धाम में भगवान शिव ने भस्मासुर को भस्म किया था। पौराणिक कथा के अनुसार भस्मासुर ने भगवान शिव की आराधना कर उनको प्रसन्न किया, जिसके फलस्वरूप शिव ने उसको मुंह मांगा वर देते हुए कहा कि भस्मासुर जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा वह वहीं भस्म हो जाएगा। शिव से वरदान मिलने के बाद भस्मासुर अहंकारी हो गया। उसने अहंकार में आकर शिव को ही भस्म करने की सोची और उनका पीछा करने लगा। भगवान शिव भस्मासुर की मंशा को भांपते हुए शिवखोड़ी की पहाड़ियों में आकर एक गुफा में बैठ गए। भस्मासुर के पीछा करने के उपरांत शिव ने मनमोहनी रूप धारण कर लिया तथा गुफा के बाहर आकर नृत्य करने लगे। मनमोहनी व सुंदर स्त्री को देखकर भस्मासुर भी उनके साथ नृत्य करने लगा। इस दौरान जैसे ही शिव ने अपना हाथ अपने सिर पर रखा तो भस्मासुर ने उनका अनुसरण करते हुए अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया, इसके बाद वह वहीं भस्म हो गया।

शिवखोड़ी की प्राकृतिक गुफा संगड़ की पहाड़ियों में स्थित है। पुरानी गुफा से भीतर जाने का रास्ता काफी संकरा और टेढ़ा-मेढ़ा है। वहां से खड़े होकर अथवा बैठ कर ही निकला जा सकता है। लगभग तेरह वर्ष पहले कोंकण रेलवे की तरफ से एक नई गुफा का निर्माण किया गया, जिससे श्रद्धालु किसी भी प्रकार से अंदर जा सकते हैं। शिवखोड़ी के आधार शिविर रनसू से जम्मू, कटड़ा, उधमपुर या फिर अन्य किसी भी स्थान से किसी भी वाहन के जरिये पहुंचा जा सकता है। आधार शिविर से गुफा तक पौने चार किलोमीटर की सरल चढ़ाई है। इसके अलावा घोड़ा पालकी की भी सेवा ली जा सकती है।

नहीं हुआ दूसरे मार्ग का निर्माण:- सरकार द्वारा कटड़ा माता वैष्णो देवी मार्ग की तरह श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए दूसरा मार्ग बनाने के लिए कहा गया था। प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि मेले के शुभारंभ करने के लिए आने वाले अतिथि हर बार दूसरा मार्ग बनाने की बात कहते हैं, लेकिन अभी तक काम शुरू करने के लिए कोई प्रयास दिखाई नहीं दिए। फिलहाल स्थानीय प्रशासन आने वाले समय में गुफा तक दूसरे मार्ग का निर्माण करने के लिए विचार कर रहा है। दूसरे मार्ग का निर्माण हो जाए, तो एक मार्ग से श्रद्धालु व दूसरे रास्ते से घोड़ा, पिट्ठू वाले गुफा की ओर आगे बढ़ेंगे।

रनसू से गुफा तक दौड़ेगी केबल कार:- शिवखोड़ी में भोले बाबा के भक्तों को हेलीकाप्टर सेवा के बाद केबल कार सेवा का तोहफा भी जल्द मिलने वाला है। जेएंडके केबल कार कारपोरेशन द्वारा रनसू से गुफा तक तीन किमी केबल कार सेवा शुरू करने के लिए सर्वे शुरू कर दिया गया है। आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को केबल कार सेवा उपलब्ध हो जाएगी। पिछले पांच वर्ष से हेलीपेड से गुफा तक श्रद्धालुओं के पैदल चलने वाले एक किमी रास्ते का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण हेलीकाप्टर सेवा फिलहाल बंद पड़ी है।

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