शिक्षक भर्ती आरक्षण नियमावली का खेल-लौटनराम निषाद

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लौटनराम निषाद
लौटनराम निषाद

69 हजार शिक्षक चयन में आरक्षण नियमावली में किया गया खेल। एससी/एसटी को जमीनों से बेदखल करने के लिए नियम में सरकार का बदलाव दलित विरोधी। शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमावली का खेल-लौटनराम निषाद

लखनऊ। लगभग 3 साल से पिछड़े और दलित वर्ग के छात्र दर दर की ठोकरें खा रहे हैं और पिछड़े और दलित वर्ग की सीटों को योगी सरकार हड़प कर खुलेतौर पर हकमारी किया है।बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का न्याय की मांग के लिए घेराव कर रहे दलित पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ बल प्रयोग अत्यंत निंदनीय है।भाजपा सरकार पूरी तरह निरंकुश व संवेदनशील होकर वंचित वर्गों,छात्र-नौजवानों,शिक्षित बेरोजगारों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रही है। 3 सालों से 69000 शिक्षक भर्ती में जिस प्रकार से दलित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को यूपी सरकार आरक्षण देने में विफल रही है उससे दलित पिछड़ा वर्ग विरोधी और सामाजिक न्याय विरोधी सरकार का चेहरा उजागर हो गया है। आरक्षित वर्ग के आंदोलनरत छात्रों के ऊपर बल प्रयोग करना बेसिक शिक्षा मंत्री का उनसे मुलाकात ना करना और आरक्षण को सही ढंग से लागू ना करना तथा 3 साल से लगातार आंदोलनरत छात्रों से वादाखिलाफी करना सरकार की एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है।

शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमावली का खेल-लौटनराम निषाद


भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ.लौटनराम निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार लगातार अपने पिछड़ा और दलित विरोधी कृत्यों के लिए पूरे देश में बदनाम है,69000 शिक्षक भर्ती में जिस प्रकार से 3 साल से पिछड़े और दलित वर्ग के छात्रों के साथ वादाखिलाफी, जोर-जबर्दस्ती और नाइंसाफी हो रही है उससे यह सच साबित हो गया है कि योगी आदित्यनाथ और उनकी पूरी सरकार पिछड़ों और दलितों के हक को लूटना चाहती है।

विधानसभा चुनाव के समय जनता में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्वीकार किया कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण प्रक्रिया गलत ढंग से लागू की गई है जिससे आरक्षित श्रेणी के लगभग 15000 छात्रों को उनकी सीट आवंटित नहीं हुई है। चुनाव के समय योगी जी ने 6800 आरक्षित श्रेणी के छात्रों को अलग से नौकरी देकर यह दशार्ने का प्रयास किया था कि वह दलित पिछड़ों के साथ है लेकिन चुनाव बीतने के बाद भाजपा अपनी पुरानी नीति दलित पिछड़ा विरोधी मानसिकता के तहत उनको उनकी सीटें नहीं दे रही है जिसके लिए छात्र लगातार आंदोलनरत हैं।भाजपा सरकार हर स्तर पर सामाजिक न्याय का गला घोंट रही है।

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निषाद ने कहा कि 86 में 56 यादव एसडीएम का बिल्कुल झूठा मुद्दा उछालकर सपा सरकार को एक जाति विशेष की सरकार का आरोप लगाकर बदनाम करने वाली भाजपा सवर्णवाद का खुला नँगा नाच कर रही है।सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास का नारा ढोंग है।भाजपा उक्त नारा लगाकर सिर्फ अपनों का भला व पिछड़ों, दलितों की खुलेआम हकमारी कर रही है और उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली का गला घोंट रही है।भाजपा सरकार तानाशाही का रास्ता अपनाकर लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या कर रही है। केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार बन्च ऑफ थॉट्स की नीतियों को लागू कर ओबीसी,एससी, एसटी के संवैधानिक अधिकारों को हड़प कर अधिकार वंचित कर रही है।


निषाद ने उत्तर प्रदेश सरकार की नई टाउनशिप नीति को पूरी तरह दलित वर्ग विरोधी नीति बताया है।शहरों में नई कॉलोनियां बसाने के लिए डीएम की पूर्व मंजूरी लिए बिना एससी-एसटी की भूमि लेने की संशोधित नियमावली को एससी/एसटी विरोधी करार देते हुए कहा कि अब सामन्ती व पूंजीपति नियम में बदलाव का सहारा लेकर जबरन दलितों की जमीन ले लेंगे।प्रदेश सरकार शहरों में लोगों की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए साढ़े 12 एकड़ में टाउनशिप बसाने की अनुमति देने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष मंगलवार को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति- 2023 का प्रस्तुतीकरण किया गया। टाउनशिप बसाने वालों को जमीन की रजिस्ट्री पर 50 फीसदी छूट दी जाएगी। इसके साथ ही नई कॉलोनियां बसाने को एससी व एसटी की जमीन लेने के लिए डीएम की पूर्व अनुमति की अनिवार्यता नहीं रहेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रस्तावित नीति पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।जो पूरी तरह दलित विरोधी निर्णय है।नीति बदलाव से प्रदेश में हाईटेक टाउनशिप नीति समाप्त हो चुकी है। इंटीग्रेटेड नीति में 500 एकड़ और हाईटेक में 1500 एकड़ की अनिवार्यता थी । प्रस्तावित नीति में दो लाख से कम आबादी वाले शहरों में न्यूनतम 12.5 एकड़ जमीन और अन्य शहरों में 25 एकड़ जमीन पर कालोनियां बसाने की अनुमति दी जाएगी।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हर क्षेत्र में पिछड़ा दलित विरोधी नियम बनाकर ओबीसी,एससी की कमरतोड़ रही है। भाजपा के 90 ओबीसी, 67 दलित विधायक,29 ओबीसी,एसटी,एससी मंत्री,39 सांसद गूंगा-बहरा बने हुए हैं। शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमावली का खेल-लौटनराम निषाद