ईआईए 2020 मसौदा, सूट-बूट की सरकार का लोकतंत्र विरोधी कदम हैः श्रीनिवास बीवी

 
लखनऊ/नई दिल्ली,  भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने एनवायरनमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट नोटिफिकेशन(ईआईए) 2020(पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना 2020) के मसौदे को केंद्र सरकार का एक और जनविरोधी कदम बताया है। श्रीनिवास ने आज जारी बयान में कहा, ‘अर्थव्यवस्था को गर्त में ले जाकर, युवाओं के रोजगार छीनकर अब केंद्र सरकार अपने सूट-बूट वाले मित्रों के फायदे लिए पर्यावरण विनाश के रूप में ईआईए 2020 का मसौदा लेकर आई है। यह सरकार जनविरोधी और लोकतंत्र विरोधी है।’

श्रीनिवास ने कहा, ‘ईआईए 2020 मसौदा में भारत के पर्यावरण, जैव विविधता, पारिस्थितिकी, जीव जंतु, वनस्पति, गरीब आदिवासियों एवं वंचित वर्ग के लोगों तथा भावी पीढ़ियों के जीवन को संकट में डालने का षडयंत्र है। केंद्र की सूट-बूट वाली भाजपा सरकार ने ईआईए 2020 मसौदे के माध्यम से उद्योगपति मित्रों के लिए देश के पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट का रास्ता तैयार किया जा रहा है नई नीति में पर्यावरण को प्रदूषित करने पर प्रोजेक्ट मालिकों के लिए मुआवजा देने का प्रावधान किया है हालांकि प्रोजेक्ट पर रोक नहीं लगाई जा सकेगी। इससे प्राकृतिक संसाधनों की लूट को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘मादी सरकार की जनहित और लोकतंत्र में कोई भरोसा नहीं है इसीलिए इस प्रस्तावित मसौदे में जनसुनवाई और जन परामर्श को औपचारिकता बना दिया गया है। यह सूट बूट की मोदी सरकार की एक ऐसी नीति है जिसके माध्यम से भारत की जनता की जिंदगी, आजीविका, रोजी-रोटी, साफ हवा, स्वच्छ जल छीना जा रहा है। इस नीति के दूरगामी परिणाम भावी पीढ़ियों के लिए प्रतिकूल होंगे। इसके अलावा केंद्र सरकार सहकारी संघवाद की भावना की हत्या करके निरंकुश तरीके से राज्यों में पर्यावरण प्रभाव प्राधिकरणों को नियुक्त करने का अधिकार हासिल कर रही है।’

श्रीनिवास ने कहा, ‘ईआईए2020 के मसौदे को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र की मोदी सरकार को सिर्फ उद्योगपति मित्रों के लाभ की परवाह है पर्यावरण व पारिस्थितिकी की नहीं? इसलिए 40 तरह के प्रोजेक्ट को इन्वायरनमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट से बाहर रखा गया है। यह नीति आम आदमी के जीवन को प्रभावित करने वाली है इसलिए इस पर संसद में बहस होना चाहिए, लेकिन केंद्र सरकार इसे जनपटल पर लाने से लगातार बच रही है। इससे यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार का संसदीय परंपराओं में भरोसा नहीं है।

भारत की 14 प्रतिशत आबादी तटीय जिलों में रहती है। भारत की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा से नीचे रहता है और यह समुद्र के जल स्तर में वृद्धि, उच्च तापमान, तथा मौसम की अप्रत्याशित घटनाओं से प्रभावित होता है, ईआईए 2020 में उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। इस प्रकार ईआईए का मसौदा केवल और केवल चंद मुनाफाखोरों को मुनाफा पहुंचाने के लिए बनाया गया है।