अमेरिका और भारत के बीच डब्ल्यूटीओ पर सहमति

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केंद्रीय मंत्री का भरतपुर में डेरा
केंद्रीय मंत्री का भरतपुर में डेरा

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका और भारत के बीच डब्ल्यूटीओ में लंबित छह विवादों पर पारस्परिक सहमति बनाने के बारे में बताया। इस ऐतिहासिक फैसले को लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति जोसेफ बाइडेन के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा की। इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच विश्वास और भागीदारी बढ़ेगी।अमेरिका ने बाजार पहुंच के लिए भारत में बनने वाले उत्पादों के लिए 70 प्रतिशत स्टील और 80 प्रतिशत एल्युमीनियम के उपयोग को मंजूरी दी।

अमेरिका और भारत के बीच डब्ल्यूटीओ पर सहमति

दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और वस्त्र मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका और भारत के बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में छह लंबित विवादों पर पारस्परिक सहमति बनने के बारे में बताया। प्रधानमंत्री की अमेरिका की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के महामहिम राष्ट्रपति जोसेफ बाइडेन ने संयुक्त रूप से इस बारे में जानकारी दी थी। नई दिल्ली में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने यह ऐतिहासिक फैसला लेने में दोनों देशों के नेताओं के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा की, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और साझेदारी बढ़ेगी।

इस क्रम में समाप्त होने वाले छह व्यापार विवादों का आगे उल्लेख किया गया है। इनमें से तीन भारत ने अमेरिका के खिलाफ दर्ज कराए थे, जिनके नाम हैं- भारत से कुछ हॉट-रोल्ड कार्बन स्टील फ्लैट उत्पादों पर प्रतिकारी उपाय (डीएस436); नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (डीएस510) से संबंधित कुछ उपाय; और स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर कुछ उपाय (डीएस547)। वहीं अन्य तीन विवाद संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ दायर किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं: सोलर सेल्स और सोलर मॉड्यूल्स (डीएस456) से संबंधित कुछ उपाय; निर्यात संबंधी उपाय (डीएस541), और संयुक्त राज्य अमेरिका से कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क (डीएस585)।

श्री गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ में इन छह लंबित विवादों को समाप्त करने के लिए भारत और अमेरिका पिछले दो वर्षों से सक्रिय रूप से चर्चा कर रहे थे। भारत और अमेरिका द्वारा इन विवादों को दर्ज कराए हुए एक दशक से अधिक समय हो गया है, जो अर्थव्यवस्था के कुछ प्रमुख क्षेत्रों जैसे स्टील, एल्यूमीनियम, नवीकरणीय ऊर्जा, सौर उत्पाद और कुछ प्रमुख निर्यात-संबंधी उपायों से संबंधित हैं। दोनों पक्षों द्वारा बातचीत के बाद निकले इस पारस्परिक रूप से सहमत समाधान (एमएएस) से बातचीत के लंबे दौर की अहमियत पता चलती है, और यह डब्ल्यूटीओ के इतिहास में अभूतपूर्व है।

इस समझौते के एक भाग के तहत, अमेरिका व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 की धारा 232 से छूट देने की प्रक्रिया के तहत स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों को बाजार पहुंच प्रदान करने पर सहमत हो गया है। भारत अतिरिक्त शुल्क यानी कुछ उत्पादों पर जवाबी टैरिफ को हटाने पर सहमत हो गया है। हालांकि,  सभी आयातों पर लागू प्रचलित मूल आयात शुल्क इन उत्पादों पर जारी रहेगा।इस बाजार पहुंच से भारतीय स्टील और एल्यूमीनियम निर्यातकों के लिए अवसर फिर से मिलेंगे, जो 14 जून, 2018 से अमेरिका के 232 के इस्तेमाल के कारण प्रतिबंधित थे, जिसके तहत स्टील और एल्यूमीनियम उत्पादों पर क्रमशः 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। बाजार पहुंच के एक भाग के रूप में, आने वाले समय में अमेरिकी वाणिज्य विभाग भारत में तैयार होने वाले उत्पादों के लिए 70 प्रतिशत स्टील और 80 प्रतिशत एल्यूमीनियम उपयोगों को मंजूरी देगा। निर्यातकों की ओर से ये उपयोग आयातकों द्वारा धारा 232 की बहिष्करण प्रक्रिया के तहत किए जाएंगे। इससे भारत के इस्पात और एल्युमीनियम निर्यात को लगभग 35 प्रतिशत बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा। अमेरिका और भारत के बीच डब्ल्यूटीओ पर सहमति