भारतीय जन गण मन के महानायक हैं अटल जी

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अजर अमर अटल बिहारी हो तुम
अजर अमर अटल बिहारी हो तुम
हृदयनारायण दीक्षित
हृदयनारायण दीक्षित


अटल जी का नाम सारी दुनिया के प्रमुख नेताओं में वरिष्ठ है। वे भारतीय जन गण मन के महानायक हैं। उनकी स्मृति बार-बार आती है। उनका पूरा व्यक्तित्व एक छंद और भावप्रवण काव्य था। विधाता ने उन्हें पूरे जतन से गढ़ा था। प्रकृति ने अपना सारा मधुरस उड़ेल दिया था उनके व्यक्तित्व में। वे सरस थे। तरल थे। सरल थे। विरल थे और विश्वमोहन। आज उनकी जन्म तिथि की पूर्व संध्या है। राष्ट्र उनका स्मरण कर रहा है। हमारे जैसे कार्यकर्ता उनकी छाया में पले। स्वाभाविक है उनका स्मरण। वैसे स्मरण उनका होता है, जिनका विस्मरण हो जाता है। अटल जी की स्मृति प्रतिपल जीवंत रहती है। वे भारतीय सार्वजनिक जीवन के शिखर शलाका पुरुष थे। वे भारतीय लोकतंत्र की दिव्यता हैं और राजनैतिक जीवन के मर्यादा पुरुष। इतिहास ने उन्हें पूरी आत्मीयता के साथ अपने अन्तःस्थल में स्थापित किया है। भारतीय जन गण मन के महानायक हैं अटल जी


इतिहास निर्मम और निष्पक्ष होता है। वह अपने पराए में भेद नहीं करता। वह अनायास ही किसी को महानायक नहीं बनाता। लोकमत भी इतिहास की तरह निर्मम होता है। इसलिए विश्व इतिहास के प्रतिष्ठित महानायक भी संपूर्ण लोकमन की प्रशंसा नहीं पा सके। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी अद्वितीय हैं। उन्होंने राष्ट्र के संपूर्ण जनगणमन का प्यार पाया। वे परिपूर्ण राष्ट्रवादी थे। वैचारिक प्रतिबद्धता में अटल थे और राष्ट्रवाद का संदेश लेकर सतत् गतिशील विहारी थे। उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक थे। वे भारतीय राजनीति के अद्वितीय महानायक थे। तमाम असंभवों का संगम थे। वे सरस भावप्रवण कवि हृदय थे और कवि थे। राजनीति के भावविहीन क्षेत्र में भी सबके प्रिय अग्रणी राजनेता। इस सदी के महानतम नेता। वे सबके प्रति आत्मीय थे। विपरीत धु्रवों से भी समन्वय की साधना बेजोड़ थी। वे सर्वप्रिय धीरोदात्त महानायक थे।


राजनीति में विपरीत ध्रुवों का समन्वय आसान नहीं होता। 1975 में आपत्काल था। देश कारागार में बदल गया था। संविधान कुचल दिया गया था। हजारों राजनैतिक सामाजिक कार्यकर्ता जेल भेजे गए थे। अटल जी ने गैरकांग्रेसी दलों से समन्वय बनाया। तमाम गैर कांग्रेसी दल साझा मंच में आए। अटल जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने मिलकर चुनाव लड़ने के लिए गैरकांग्रेसी दलों को सहमत किया। 1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी जीती। सरकार भी बनी। वे विदेश मंत्री बने। दिल्ली में भारतीय जनसंघ का अधिवेशन हुआ। अटल जी ने जनसंघ के विसर्जन का प्रस्ताव रखा। वे पं0 दीनदयाल उपाध्याय का नाम लेकर रोने लगे। जनसंघ की विकास यात्रा में उपाध्याय, अटल जी आदि अनेक नेताओं कार्यकर्ताओं ने अपना श्रम तप लगाया था। जनसंघ का विसर्जन भावुक क्षण था। इन पंक्तियों का लेखक भी इस भावुक प्रवाह का हिस्सा था। जनसंघ का विसर्जन हुआ। अब सब जनता पार्टी के हिस्से थे। कुछ समय बाद जनता पार्टी में कलह हुई। जनसंघ घटक के सदस्यों पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नाम पर दोहरी सदस्यता का आरोप लगा। अटल जी ने यू0पी0 की एक जनसभा में चुटकी ली “उन्होंने पहले प्यार किया, सम्बंध बनाये। सम्बन्धों का लाभ उठाया और अब हमसे हमारा गोत्र वंश पूछते हैं।” बात नहीं बनी। जनसंघ घटक अलग हो गया। अटल के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी बनी। अटल जी के नेतृत्व का सम्मोहन बढ़ता गया।


अटल जैसी वक्तव्य कला दुर्लभ। शब्द उनके आज्ञापालक थे। उनका शब्द चयन और प्रयोग अद्भुत था। मनमोहन प्रभाव था उनके भाषण में। वे नेता प्रतिपक्ष बने। प्रधानमंत्री बने। विपक्षी नेता के रूप में उन्होंने विषय प्रतिपादन का नया रिकार्ड बनाया। संसद उन्हें पूरे मनोयोग से सुनती थी जब वे विपक्ष में थे तब नरसिंहाराव तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उन्हें विदेशी प्रतिनिधिमण्डल का नेता बनाया। यह भी एक विशेष अवसर था। उन्होंने देश के बाहर भारतीय जनतंत्र की प्रतिष्ठा बढ़ाई, “उन्होंने कहा कि वे भारत में विरोधी दल के नेता हैं लेकिन देश के बाहर भारत के प्रतिनिधि। उनके विचार मननीय हैं। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति बताया। हिन्दू और हिन्दुत्व को भारत की जीवनशैली बताया। उनकी कविता ‘तन मन हिन्दू मेरा परिचय’ खासी चर्चा में रहती है। उन्होंने राजनीति में भारतीय संस्कृति का प्रवाह पैदा किया। जो कहा, सीना ठोककर कहा। लोग तिलमिलाए। ऐसे लोगों ने जनसंघ पर साम्प्रदायिकता का आरोप लगाया।  अटल जी ने संसद में साम्प्रदायिकता की परिभाषा करने की मांग भी की। सब चुप हो गए।

भारतीय जन गण मन के महानायक हैं अटल जी


अटल जी पत्रकार, साहित्यकार थे। लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रधर्म पत्रिका के सम्पादक रहे थे। पत्रिका के सम्पादक मण्डल ने भारतीय जनसंघ व भारतीय जनता पार्टी पर विशेषांक प्रकाशित करने का निर्णय लिया। सम्पादक मण्डल ने मुझे दोनों विशेषांकों का अतिथि सम्पादक बनाया। इसका विमोचन दिल्ली भाजपा कार्यालय में अटल जी व आडवाणी जी ने किया था। विमोचन के पहले अटल जी ने दोनों अंक देखने के लिए मांगे। मैंने पत्रिका के प्रबंधक पवन पुत्र बादल के साथ अटल जी को दोनों अंक दिखाए। विशेषांकों के आलेख व चित्र संयोजन देखकर वे भावुक हुए। उन्होंने इस अनुष्ठान की प्रशंसा की। मुझे बधाई भी दी। इस तरह वे अपने सहयोगियों को लिखने पढ़ने की प्रेरणा देते थे। अटल जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बना। क्षेत्रीय दलों को राष्ट्रीय आकांक्षा और राष्ट्रीय दलों को क्षेत्रीय कठिनाइयां समझने का अवसर मिला। विश्व परिवार ने अटल जी के नेतृत्व का सम्मान किया। लेकिन अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी परमाणु परीक्षण से सहमत नहीं थी। अटल जी यह बात जानते थे। इसके कारण संभावित आर्थिक प्रतिबंधों से भी वे अवगत थे। लेकिन उन्होंने परमाणु परीक्षण का निर्णय लिया। दुनिया के कई देश नाराज भी हुए। संसद में भी भारी बहस हुई। उन्होंने पूरे स्वाभिमान के साथ अपने निर्णय का पक्ष रखा। उन्होंने संसद में देश की प्राथमिकता बताई “परमाणु परीक्षण सम्बंधी हमारे निर्णय की एक मात्र कसौटी राष्ट्रीय सुरक्षा ही है। हमने किसी अन्तर्राष्ट्रीय करार का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण किसी देश के विरूद्ध भय उत्पन्न करने अथवा आक्रमण करने के लिए नहीं हैं।” चन्द्रशेखर ने टिप्पणी की। उनकेे कथन पर अटल जी की टिप्पणी ध्यान देने योग्य है। अटल जी ने कहा कि मुझे खेद है कि मैं आपके विचारों से सहमत नहीं हूं।” चन्द्रशेखर की बात काटते हुए भी वे शील और मर्यादा में ही रहे।


लोकतंत्र उनकी जीवन श्रद्धा था। अटल जी ने भारत के राजनैतिक आकाश में सार्वजनिक जीवन की मर्यादा रेखा खींची है। यह रेखा बहुत ऊंची है। मूल्य आधारित सार्वजनिक जीवन की यह रेखा हम सभी राजनैतिक दलों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने लोकतंत्र को भारत की जीवनशैली बताया था। अटल जी के अनुसार “लोकतंत्र 49 बनाम 51 का अंकगणित नहीं है। सबकी अभिलाषा और राष्ट्रीय स्वप्नों के लिए सबको साथ लेकर कल्याण करना ही जनतंत्री राजनीति है। अटल जी सभी दलों और नेताओं में लोकप्रिय थे। उन्होंने भारतीय राजनीति को अनेक प्रतीक प्रतिमान दिये। राष्ट्र सर्वोपरिता की सगुण जीवनदृष्टि दी। संसदीय मर्यादा पालन के नए आयाम दिये। अटल जी का जीवन असंभव का संभव है – संभवामि युगे युगे। वे प्रतिपल भारत के राष्ट्रजीवन में है, भारत की धरती और आकाश में स्पंदित हैं। भारत के अणु परमाणु में उनका कृतित्व और विचार रस बस गया है। वे भारत रत्न हैं। भूत काल में ही नहीं सदा सर्वदा भारत रत्न।

इतिहास अनायास ही किसी को महानायक नहीं बनाता। कश्मीर के प्रख्यात इतिहासकार कल्हण ने राजतरंगिणी में लोकमत को निर्मम बताया है। उनके अनुसार लोकमत सामान्यतया आलोचक ही होता है। विश्व इतिहास के निर्माता और प्रतिष्ठित महानायक भी संपूर्ण लोकमन की प्रशंसा नहीं पा सके, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी विरल हैं। उन्होंने भारत के संपूर्ण जनगणमन का प्यार पाया। वह परिपूर्ण राष्ट्रवादी थे। अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता में अटल थे बावजूद इसके उनके विचार के विरोधी भी उनके प्रशंसक थे। व्यवहार में सरल, तरल अटल जी भारतीय राजनीति के विरल महानायक थे। वह तमाम असंभवों का संगम थे। वह सरस भावप्रवण कवि हृदय थे, लेकिन राजनीति के भावविहीन क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राजनेता के तौर पर स्थापित हुए। जैसे विश्वमोहन मुस्कान और शब्दों की जादूगरी वैसे ही आचार व्यवहार में सबके प्रति आत्मीय।

अटल जी ने भारत के राजनीतिक सार्वजनिक जीवन के लिए एक मर्यादा रेखा खींची। यह रेखा सामान्य राजनीति से बहुत ऊंची है। मूल्य आधारित विचारनिष्ठ सार्वजनिक जीवन की यह रेखा सभी राजनीतिक दलों के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने लोकतंत्र को भारत की जीवनशैली बताया। उनके अनुसार लोकतंत्र 49 बनाम 51 का अंकगणित नहीं है। सबकी इच्छा, अभिलाषा और राष्ट्रीय स्वप्नों के लिए सबको साथ लेकर लोकजीवन का कल्याण करना ही जनतंत्री राजनीति है। इसीलिए वह सभी दलों और नेताओं में लोकप्रिय थे। उन्होंने भारतीय राजनीति को अनेक प्रतीक प्रतिमान दिए। राष्ट्र सर्वोपरिता की सगुण जीवनदृष्टि दी। संसद में मर्यादा पालन के नए आयाम दिए। एक लंबे अर्से से मौत से उनकी टक्कर थी। मौत भी उनसे लड़ते लड़ते थक सी गई थी। उन्होंने अपनी कविता में लिखा है- मौत से ठन गई/जूझने का मेरा कोई इरादा न था/मोड़ पर मिलेंगे/इसका वादा न था/रास्ता रोककर वह खड़ी हो गई/मैं जी भर जिया/मैं मन से मरूं/लौटकर आऊंगा/कूच से क्यों डरूं..?

अटल जी भी इतिहास पुरूष पुराण पुरूष हैं। इतिहास ने उन्हें अपने हृदय में स्थान दिया है। शरीर का क्या..? यह क्षण भंगुर है। अटल सत्य यही है कि जो आता है, सो जाता है, लेकिन अटल जी का जीवन सतत प्रवाही है। राष्ट्र के लिए ही जन्म और जीवन की संपूर्ण गति असंभव है। अटल जी का जीवन असंभव का संभव है- संभवामि युगे युगे। वह प्रतिपल भारत के राष्ट्रजीवन में है। भारत के अणु परमाणु में उनका कृतित्व और विचार रस बस गया है। भारतीय जन गण मन के महानायक हैं अटल जी