गृह मंत्री अमित शाह का बयान

अजय सिंह

आज सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि जाकिया जाफरी किसी और के निर्देश पर काम करती थी। एनजीओ ने कई पीड़ितों के हलफनामे पर हस्ताक्षर किए और उन्हें पता भी नहीं है। सब जानते हैं कि तीस्ता सीतलवाड़ की NGO ये सब कर रही थी और उस समय की आई यूपीए की सरकार ने NGO की बहुत मदद की है,गुजरात में हमारी सरकारी थी लेकिन यूपीए की सरकार ने NGO की मदद की है। सब जानते हैं कि ये केवल मोदी जी की छवि खराब करने के लिए किया गया था,मोदी जी SIT के सामने कोई नाटक करते हुए नहीं गए थे कि मेरे समर्थन में आओ और धरना दो। हमारा मानना ​​​​था कि हमें कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए। अगर SIT सीएम से सवाल करना चाहती है तो सीएम खुद सहयोग करने को तैयार है तो फिर आंदोलन किस चीज का….?

अमित शाह ने कहा कि ‘मैं खुद गिरफ्तार किया गया था। हमने कोई प्रदर्शन नहीं किया। जब लंबी लड़ाई के बाद जीत हासिल हुई है और आज जब सत्य सोने की तरह चमकता हुआ सामने आ रहा है, तो अच्छा लग रहा है।’ शाह ने कहा कि जिन लोगों ने भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ आरोप लगाए थे, अगर उनकी अंतरात्मा है तो उन्हें भाजपा और नरेंद्र मोदी से माफी मांगनी चाहिए। अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात के दंगों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को खराब करने के लिए यूपीए की सरकार ने कई एनजीओ की मदद की।

गुजरात दंगों में सेना को नहीं बुलाने के सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह का बयान जहां तक गुजरात सरकार का सवाल है हमने कोई लेटलतीफी नहीं की, जिस दिन गुजरात बंद का एलान हुआ था उसी दिन हमने सेना को बुला लिया था।गुजरात सरकार ने एक दिन की भी देरी नहीं की थी और कोर्ट ने भी इसका प्रोत्साहन किया है,लेकिन दिल्ली में सेना का मुख्यालय है, जब इतने सारे सिख भाइयों को मार दिया गया, 3 दिन तक कुछ नहीं हुआ। कितनी SIT बनी? हमारी सरकार आने के बाद SIT बनी। ये लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं….?

एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक लोगों के लिए यह आदर्श उदाहरण पेश किया है कि कैसे संविधान का सम्मान किया जाता है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पूछताछ की गई, लेकिन कहीं भी प्रदर्शन नहीं हुआ। पूरे देश में कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी के समर्थन में एकत्र नहीं हुए, हमने कानून के साथ सहयोग किया।भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियां, कुछ विचारधारा के लिए राजनीति में आए पत्रकार और NGO ने मिलकर आरोपों का इतना प्रचार किया और इसका इकोसिस्टम इतना मजबूत था कि लोग इनको ही सत्य मानने लगे।

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