नेशनल हाईवे के डिवाइडर पर अब नहीं होगा कोई कट

नेशनल हाईवे के डिवाइडर पर अब कोई कट नहीं होगा। अजमेर के किशनगढ़ से गुजरात के रतनपुर तक बन चुका है ऐसा हाईवे।डिवाइडर से चालीस मीटर दूर बने रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे आदि के मालिकों को भी ढाई लाख रुपए का सुविधा शुल्क देना होगा।घटिया हेलमेट बेचने वालों पर एक लाख का जुर्माना। सड़क सुरक्षा के प्रावधानों में अजमेर के आरटीओ वीरेंद्र सिंह राठौड़ की सक्रिय भूमिका।

एस0 पी0 मित्तल

जमेर के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी वीरेंद्र सिंह राठौड़ देश के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने सड़क सुरक्षा के नए प्रावधान लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। यदि इन प्रावधानों पर अमल किया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। राठौड़ का मानना है कि नए प्रावधानों पर अमल जल्द से जल्द होना चाहिए। किसी भी मनुष्य के लिए जीवन सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि सड़क दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो यह सबसे दुख बात है। एक सदस्य की मृत्यु पर पूरे परिवार को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जब किसी युवा का मृत्यु सड़क दुर्घटना में होती है तो परिवार के लिए सबसे ज्यादा दुखदायी बात होती है। राठौड़ ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा योगदान दुपहिया वाहनों का है। कुल दुर्घटनाओं का 35 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण दुपहिया वाहन है। उन्होंने बताया कि देश में 28 करोड़ वाहन है, इनमें से दो करोड़ राजस्थान में रजिस्टर्ड है। पूरी दुनिया में भारत का सड़क नेटवर्क सबसे बड़ा है। देश में 67 लाख किलोमीटर की सड़कें हैं। लेकिन इनमें से मात्र डेढ़ लाख किलोमीटर ही नेशनल हाइवे हैं। राठौड़ ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से नेशनल हाईवे के निर्माण में तेजी आई है। मौजूदा समय में प्रतिदिन 37 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण हो रहा है। नेशनल हाईवे को दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने अनेक प्रावधान किए हैं। सबसे बड़ा प्रावधान नेशनल हाईवे के डिवाइडर पर कट नहीं होने का है। अब जो हाईवे बन रहे हैं उनके डिवाइडर पर कोई कट नहीं होगा। पहले के हाईवे को भी कट मुक्त बनाया जाएगा।

राठौड़ ने बताया कि हाईवे पर 3 प्रकार के अंडर पास बन रहे हैं। पहला केटल, दूसरा वेक्युलर और तीसरा पैदल। ऐसे अंडर पास पांच किलोमीटर की दूरी तक बनेंगे। इन अंडर पास के बनने से देश भर के नेशनल हाइवे पर क्रॉसिंग नहीं होगी। कट मुक्त हाईवे बनाने का उद्देश्य दुर्घटनाओं को रोकना है। मौजूदा समय में दिल्ली से मुम्बई के बीच निर्माणाधीन नेशनल हाईवे संख्या 48 को कट मुक्त बनाया जा रहा है। सिक्स लेन वाले इस हाईवे पर कोइ कट नहीं है। हाईवे के निर्माण के दौरान ही तीनों प्रकार के अंडरपास बनाए जा रहे हैं। अजमेर के किशनगढ़ से गुजरात सीमा के रतनपुर तक ऐसा हाईवे बन रहा है। जरुरत होने पर फुट ओवर ब्रिज भी बनाए जा रहे हैं। अजमेर के बांदनवाड़ा के निकट सिंगावल गांव में नेशनल हाइवे पर फुट ओवर ब्रिज बन रहा है। राठौड़ ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत डिवाइडर से चालीस मीटर तक कोई रेस्टोरेंट, ढाबा, होटल, मकान आदि नहीं होगा। यानी डिवाइडर से चालीस मीटर दूर निर्माण हो सकेगा। प्रत्येक नेशनल हाइवे पर सिक्स लेन के बाद 10 मीटर चौड़ी पट्टी अलग से होगी। इस पट्टी का उपयोग करने के लिए होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा आदि के मालिकों से 15 वर्ष के लिए ढाई लाख रुपए का सुविधा शुल्क लिया जाएगा। राठौड़ ने कहा कि देशभर में कट मुक्त हाईवे बनने से दुर्घटनाओं में अपने आप कमी आ जाएगी। राठौड़ ने शहरी क्षेत्र में हेलमेट की समस्या पर भी चिंता जताई। नए प्रावधानों में दुपहिया वाहन पर दूसरे व्यक्ति को भी हेलमेट लगाना अनिवार्य है।

शहरों में अभी सिर्फ चालक को ही अनिवार्यता की श्रेणी में माना गया है। यदि दुपहिया वाहन पर सवार दूसरा व्यक्ति हेलमेट नहीं लगाता है तो यह कानून उल्लंघन है। बिना हेलमेट वाले व्यक्तियों से एक एक हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं दुपहिया वाहन का चालक यदि बिना हेलमेट के पकड़ा जाता है तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिए निलंबित किया जाएगा। निलंबन अवधि में यदि ऐसा व्यक्ति वाहन चालते पकड़ा गया तो दो हजार रुपए का प्रावधान किया गया है। ऐसे व्यक्ति को अपना ड्राइविंग लाइसेंस दोबारा से बनवाना पड़ेगा। राठौड़ ने कहा कि बाजारों में ठेलों पर हेलमेट बिकते देखे जाते हैं। घटिया हेलमेट बेचने वाले पर भी एक लाख रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार घटिया हेलमेट बनाने वाले व्यक्ति पर भी दो लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। राठौड़ ने कहा कि हेलमेट आईएसआई मार्क होना चाहिए। जो लोग विभिन्न अवसरों पर नि:शुल्क हेलमेट वितरित करते हैं,उनका भी यह दायित्व है कि वे स्टैंडर्ड मापदंड के अनुरूप ही हेलमेट खरीदे। एक हेलमेट का वजन एक किलो 20 ग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि हेलमेट चौथी मंजिल से गिरे तब भी उसमें क्रेक नहीं आना चाहिए। स्टैंडर्ड हेलमेट की कीमत न्यूनतम 12 सौ रुपए होती है। राठौड़ ने दुपहिया वाहन चालकों से आग्रह किया कि वे आईएसआई मार्का वाला स्टैंडर्ड हेलमेट ही खरीदे। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में जो नए नए प्रावधान किए जा रहे हैं।

[/Responsivevoice]