आयुष कॉलेजों में अब नहीं होगी मनमानी-दयालू


लखनऊ। खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला स्थापित कराये जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10 मण्डल मुख्यालयों पर निर्माण कार्य प्रारम्भ कराया गया था। 100 दिन की कार्य योजना में झांसी तथा देवीपाटन (गोण्डा) मण्डल मुख्यालय पर भवन निर्माण का कार्य प्रारम्भ करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है। राज्य में स्थापित 06 खाद्य प्रयोगशालाओं में से लखनऊ में 03 भ्प्ळभ् म्छक् म्फन्प्च्डम्छज्ै स्थापित/संचालित हैं। 100 दिन की कार्ययोजना के अन्तर्गत मेरठ एवं वाराणसी प्रयोगशाला में (02-02 नग) को स्थापित/संचालित कर जॉंच प्रारम्भ कर दिया गया है। इस प्रकार लक्ष्य पूर्ण कर लिया गया है,के स्थापित होने से खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाइट्स, रेसीड्यूज, हैवीमेटल्स, एण्टीबायोटिक्स एवं आर्गेनिक खाद्य उत्पादों की जाँच सम्भव हो पाएगी।

उत्तर प्रदेश के आयुष एवं खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्रा ‘दयालू’ ने आज लोक भवन स्थित मीडिया सेन्टर में विभाग की 100 दिवसीय कार्ययोजना पर प्रेसवार्ता किया। उन्होंने बताया कि 07 नई सचल खाद्य प्रयोगशालाओं को 07 मण्डलों-गोरखपुर, वाराणसी, झांसी, बरेली, मुरादाबाद, देवीपाटन (गोण्डा) व सहारनपुर में संचालित किये जाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है। वर्तमान में राज्य में स्थापित 06 राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशालाओं-लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा एवं मेरठ में खाद्य एवं औषधि नमूनों तथा झॉंसी में खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया जा रहा है।


प्रदेश में वर्ष 2021 तक केवल लखनऊ स्थित राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला में औषधि नमूनों का विश्लेषण कार्य किया जाता था। वर्ष 2022 से वाराणसी में औषधि नमूनों का विश्लेषण कार्य प्रारम्भ किया गया है। 100 दिन की कार्य योजना के अन्तर्गत मेरठ, गोरखपुर तथा आगरा प्रयोगशालाओं में अपेक्षित उपकरण स्थापित कर औषधि नमूनों का विश्लेषण प्रारम्भ कर दिया गया है। इस प्रकार लक्ष्य पूर्ण कर लिया गया है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा 2019-2020 में ईट राईट कैम्पस योजना के अन्तर्गत ऐसे शिक्षा संस्थानों, कारखानों एवं प्रशिक्षण संस्थानों जहाँ छात्रों/कर्मचारियों को भोजन प्रदान किये जाने की व्यवस्था है, को एफ.एस.एस.ए.आई द्वारा नामित स्वतंत्र ऑडिट एजेन्सियों से ऑडिट कराकर ईट राईट कैम्पस प्रमाणीकरण प्रदान किया जाता है। 100 दिन की कार्य योजना के अन्तर्गत 100 संस्थानों को ईट राईट कैम्पस योजना से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है।


आयुष मंत्री ने बताया कि एफ.एस.एस.ए.आई. द्वारा प्रारम्भ कार्यक्रम के अन्तर्गत किसी भी धार्मिक स्थल पर बिकने/वितरित किये जाने वाले प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित किये जाने हेतु एफ.एस.एस.ए.आई. द्वारा नामित स्वतंत् ऑडिट एजेन्सियों से मन्दिर परिसर/प्रांगण का ऑडिट कराकर वहाँ स्थापित रसोई/दुकानों में समुचित साफ सफाई तथा गुणवत्ता परक प्रसाद का वितरण/विक्रय सुनिश्चित किया जाना है। उन्होंने बताया कि 100 दिन की कार्ययोजना के अन्तर्गत प्रदेश में 75 धार्मिक स्थलों यथा-लखनऊ में हनुमान सेतु मन्दिर, कानपुर मे स्कान मन्दिर, गाजियाबाद में मोदी मन्दिर, व मेरठ में हनुमान मन्दिर बुढ़ाना गेट, वाराणसी में संकटमोचन मन्दिर एवं श्री अन्नपूर्णा मन्दिर आदि को ठभ्व्ळ योजना से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है।

दयाशंकर मिश्रा ने बताया कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा खाद्य नियमों के स्वअनुपालन की प्रणाली विकसित किये जाने के उद्देश्य से हाइजीन रेटिंग के कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2019-20 में की गयी थी। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वतंत्र ऑडिट एजेन्सियों एवं प्रशिक्षण एजेन्सियों द्वारा खाद्य प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले कार्मिकों/व्यापारियों को प्रशिक्षित कर उनका क्षमता संवर्धन किया जाता है तथा संस्थान में विद्यमान कमियों को दूर करते हुए संस्थान का ऑडिट कर 01 से 05 तक रेटिंग प्रदान की जाती है । 05 रेटिंग प्राप्त संस्थान को अच्छे खाद्य पदार्थ विक्रय प्रतिष्ठान के रुप में जाना जाता है। 100 दिन की कार्य योजना के अन्तर्गत प्रदेश में 2000 संस्थानों को हाइजीन रेटिंग प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है तथा अब तक 3267 संस्थानों को हाइजीन रेटिंग प्रदान की जा चुकी है।


प्रदेश में औषधि विक्रय लाइसेंस आनलाइन निर्गत किये जाते हैं। अनुज्ञप्तिधारक द्वारा अपने मुख्य प्रतिष्ठान के अतिरिक्त औषधियों के भण्डारण करने के लिए गोदाम हेतु लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार किसी फर्म का संविधान परिवर्तन होने की दशा में अनुज्ञप्तिधारक को नवीन लाइसेंस लेने की आवश्यकता होती है। संविधान परिवर्तन के फलस्वरूप लाइसेंस नम्बर परिवर्तित होने के कारण व्यापारी को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था, जिसके दृष्टिगत साफ्टवेयर में सरलीकरण किया गया तथा पुराना लाइसेंस नम्बर ही निर्गत करने की व्यवस्था की गयी। 100 दिन की कार्ययोजना में साफ्टवेयर सरलीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पूर्ण कर लिया गया है। इससे व्यापारियों को होने वाली कठिनाई समाप्त हुई। खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम एवं तत्सम्बन्धित विनियम के अनुसार प्रत्येक खाद्य व्यवसायी को खाद्य लाइसेंस/पंजीकरण प्राप्त किया जाना आवश्यक है। 12 लाख रुपये से अधिक वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को राज्य खाद्य लाइसेंस तथा रुपये 12 लाख तक अथवा उससे कम वार्षिक टर्न ओवर वाले व्यापारियों को खाद्य पंजीकरण प्राप्त किया जाना आवश्यक है। 100 दिन की कार्य योजना के अन्तर्गत निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 05 जुलाई 2022 तक 91,780 (91 प्रतिशत) खाद् लाइसेंस तथा 6,11,410 (100 प्रतिशत से अधिक) खाद्य पंजीकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है।


श्री दयालू ने बताया कि 500 हेल्थ वेलनेस सेन्टरस् से सेवित आबादी का बी0एच0यू0 वाराणसी के साथ हेल्थ सर्वे, आयुश का प्रचार-प्रसार एवं प्उचंबज ैजनकल. 8 राजकीय आयुर्वेद माहविद्यालय से संबंद्ध चिकित्सालयो एवं 500 हेल्थ वेलनेस सेन्टरस् के चिकित्साधिकारियो को इस कार्य हेतु प्रषिक्षित किये जाने हेतु 30 अप्रैल 2022 को सर्वे से संबंधित अधिकारियो को एक दिवसीय प्रषिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न किया जा चुका है। प्उचंबज ैजनकल हेतु निर्धारित प्रोफार्मा भरने का कार्य दिनॉक-01 जून 2022 से प्रारम्भ कर दिया गया है। अद्यतन 3000 रोगियों का सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत स्वीकृत 500 आयुश हेल्थ एवं वेलनेस सेन्टरस् द्वारा सेवित आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा को प्राकृतिक तरीके से किये जाने का परामर्ष उपलब्ध कराने के साथ-साथ सामान्य बीमारियो का उपचार आयुष विधा से करने तथा गम्भीर रोगियो को उच्चीकृत केन्द्रो पर रिफर करने का कार्य किया जाता है। इन वेलनेस सेन्टरस् पर उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओ के प्रचार-प्रसार, सेवित आबादी के सर्वे एवं औशधियो के प्रभाव का अध्ययन किये जाने हेतु बी0एच0यू0 वाराणसी के नेतृत्व में एक प्उचंबज ैजनकल का कार्य प्रारम्भ किया जा चुका है।


आयुष मंत्री ने बताया कि महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुश विष्वविद्यालय द्वारा राजकीय एंव निजी आयुश महाविद्यालयो का सम्बद्धीकरण- सम्बद्धीकरण का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। वर्तमान में कुल 105 आयुश विधा के महाविद्यालयों द्वारा संबंद्धता हेतु पंजीकरण कराया जा चुका है। जिनमें से 19 राजकीय एंव 86 निजी महाविद्यालय है। आयुश विष्वविद्यालय द्वारा निजी स्नातक व स्नाकोत्तर महाविद्यालयों की सम्बद्धता शुल्क निम्नवत् निर्धारित किया गया हैः-
क्र0सं0 महाविद्यालय का प्रकार प्रवेश क्षमता निर्धारित शुल्क
1 स्नातक 100 सीट 1,50,000
2 स्नातक 60 सीट 1,30,000
3 स्नातक एंव स्नाकोत्तर – 1,50,000
इस प्रकार यह लक्ष्य पूर्ण है।
सम्पर्क सूत्र- आशीष सिंह