दिमागी बुखार से होने वाली मौतों पर 95 प्रतिशत तक नियंत्रण

प्रदेश में दिमागी बुखार से होने वाली मौतों पर 95 प्रतिशत तक नियंत्रण पा लिया गया।प्रदेश में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान 01 जुलाई से 31 जुलाई, 2022 तक तथा दस्तक अभियान 16 से 31 जुलाई, 2022 तक संचालित किया जाएगा।टीम वर्क का नतीजा है कि आज इंसेफेलाइटिस व अन्य संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाने में कामयाबी मिली: मुख्यमंत्रीप्रदेश में कालाजार पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया, मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भी हम तेजी से अग्रसर।फाइलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे, सामूहिक प्रयासों से डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भी कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाया गया।प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक भारत को टी0बी0 मुक्त करने के संकल्प के साथ अभियान शुरू किया, टी0बी0 के मरीजों के मुफ्त उपचार की व्यवस्था की गई।प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किये गये स्वच्छ भारत मिशन ने इंसेफेलाइटिस उन्मूलन की दिशा में नींव का कार्य किया।भारत सरकार के सहयोग से बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी सेंटर की स्थापना की गई, यह देश का एकमात्र मेडिकल कॉलेज, जहां वायरोलॉजी सेंटर भी है।मुख्यमंत्री ने विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के जागरूकता वाहन को झंडी दिखाकर रवाना किया।


गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार (इंसेफेलाइटिस) से होने वाली मौतों पर 95 प्रतिशत तक नियंत्रण पा लिया गया है। यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण पाने में समाज के हर एक तबके ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। अब हमें बची 05 प्रतिशत बीमारी पर भी नियंत्रण प्राप्त कर इंसेफेलाइटिस का पूर्ण उन्मूलन करना है।मुख्यमंत्री बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में प्रदेश स्तरीय विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के शुभारंभ के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान 01 जुलाई से 31 जुलाई, 2022 तक तथा दस्तक अभियान 16 से 31 जुलाई, 2022 तक संचालित किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य सिर्फ उपचार का नाम नहीं है बल्कि इसमें जागरूकता, अंतर्विभागीय समन्वय व टीमवर्क का बड़ा योगदान होता है। इन सबको एक साथ लेकर चलाए गए कार्यक्रम का ही परिणाम है कि आज पूर्वी उत्तर प्रदेश दिमागी बुखार से उन्मूलन की दिशा में तेजी से अग्रसर है।


चार वर्ष पूर्व तक जुलाई माह प्रारम्भ होते ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार से मौतें होने लगती थीं। विगत चार साल में आशा बहनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, बेसिक शिक्षा के शिक्षकों, नगर विकास, ग्राम्य विकास, पंचायती राज विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग से मिलकर तथा यूनिसेफ, डब्ल्यू0एच0ओ0, पाथ आदि संस्थाओं के साथ जुड़कर अंतर्विभागीय समन्वय से अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया। इसी टीम वर्क का नतीजा है कि आज इंसेफेलाइटिस व अन्य संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाने में कामयाबी मिली है।इंसेफेलाइटिस या दिमागी बुखार की चपेट में जो भी 05 प्रतिशत बच्चे शेष रह गए हैं हमें उन्हें भी बचाना है। दिमागी बुखार होने की दशा में बच्चे को समय से उपचार नहीं मिला तो वह जीवित रहने पर भी शारीरिक या मानसिक दिव्यांगता का शिकार हो जाता है। ऐसे दिव्यांग बच्चों के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पुनर्वास केंद्र खोला है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए बीमारी को लेकर पहले से सावधानी रखनी होगी और यदि इसके बावजूद भी बीमारी हो गई तो समय पर उपचार दिलाना होगा। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को सरकारी अस्पतालों में तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ले जाकर इलाज कराएं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी बीमारी हो तो वह चुनौती पूरे समाज की होती है। वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान हम सभी ने इसे महसूस किया है। बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चे समाज और देश की बहुमूल्य धरोहर हैं। इस धरोहर को बचाने की जिम्मेदारी सबकी है। उन्होंने कहा कि जेई0/ए0ई0एस0 बीमारी के पूर्ण उन्मूलन के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। प्रत्येक तीन माह पर और वर्ष भर में 04 ऐसे अभियानों के साथ हम सभी को जुड़ना होगा। प्रदेश के अन्य क्षेत्र में अलग-अलग बीमारियां देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र इंसेफेलाइटिस, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया या कालाजार बीमारी से प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने अपने अभियानों व सामूहिक प्रयासों से क्रमशः इन सभी बीमारियों पर नियंत्रण पाया है।


प्रदेश में कालाजार पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया है। मलेरिया उन्मूलन की दिशा में भी हम तेजी से अग्रसर हैं। फाइलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सामूहिक प्रयासों से डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भी कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान से सामूहिकता के साथ जुड़कर हम दिमागी बुखार के साथ सभी प्रकार के संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण पाने में सफल होंगे। अभियान के तहत आशा बहनें, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग समेत अनेक विभागों के कर्मी व विभिन्न संस्थाओं के लोग प्रदेश के हर घर पर दस्तक देकर लोगों को जागरूक करेंगे। साथ ही, कहीं कोई बीमार मिलेगा तो उसे एम्बुलेंस से ले जाकर अस्पताल में इलाज की व्यवस्था की जायेगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक भारत को टी0बी0 मुक्त करने के संकल्प के साथ अभियान शुरू किया है। टी0बी0 के मरीजों के मुफ्त उपचार की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि सभी की जिम्मेदारी है कि यदि कोई टी0बी0 का मरीज मिले तो उसे अस्पताल ले जाने व उसके उपचार की व्यवस्था के लिए शासन व प्रशासन की मशीनरी के साथ जुड़ें। ऐसे मरीजों को गोद लें। शासन इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध कराती है। यदि प्रदेश टी0बी0 से मुक्त हो गया तो देश को इससे मुक्त होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी।पूर्वी उत्तर प्रदेश ने दिमागी बुखार के कारण वर्ष 1977 से वर्ष 2017 तक 40 वर्षाें में लगभग 50 हजार बच्चों को खोया है। इंसेफेलाइटिस के खिलाफ प्रदेश में जो लड़ाई लड़ी गयी, उसमें जनप्रतिनिधि और जनता भी शामिल रही। इसके उन्मूलन के लिए लड़ी गई लंबी लड़ाई का परिणाम सबके सामने है। उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा शुरू किये गये स्वच्छ भारत मिशन ने इंसेफलाइटिस उन्मूलन की दिशा में नींव का कार्य किया है। उन्होंने स्वच्छता के विशेष अभियान चलाए जाने के लिए प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया। शहर से लेकर गांव तक, मोहल्लों से लेकर गली तक वृहद स्तर पर लोग सामूहिकता के साथ इस अभियान से जुड़े। गांव में प्रधान से लेकर सांसद तथा शहरों में पार्षद से लेकर महापौर तक सबने अपना योगदान दिया। स्वच्छता अभियान के साथ शुद्ध जल आपूर्ति के कार्यक्रम को भी तेजी से आगे बढ़ाया गया।


दिमागी बुखार के उपचार के लिए बड़े पैमाने पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किए गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक आई0सी0यू0 की व्यवस्था की गई। बाल रोग विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। सर्विलांस की गति को बढ़ाया गया। आशा बहनों के सहयोग से किसी भी बच्चे को बुखार होने पर बिना इंतजार उन्हें इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर पहुंचाया गया। आवश्यकता होने पर उन्हें सरकारी एंबुलेंस से सी0एच0सी0, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज लाया गया। बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज में हर बेड पर वेंटिलेटर और पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की तैनाती के साथ सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। आज इन सबका सकारात्मक परिणाम इंसेेफेलाइटिस नियंत्रण के रूप में दिखता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के सहयोग से बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी सेंटर की स्थापना की गई है। यह देश का एकमात्र मेडिकल कॉलेज है, जहां वायरोलॉजी सेंटर भी है। यहां विषाणुजनित हर बीमारी को चिन्हित करने की व्यवस्था है।


मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, नगर निगम, मलेरिया व टी0बी0 उन्मूलन को लेकर लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने 03 महिला लाभार्थियों की गोद भराई की तथा उन्हें पोषाक आहार की टोकरी प्रदान की। साथ ही, 02 बच्चों का अन्नप्राशन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के जागरूकता वाहन को भी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान पर आधारित लघु चल चित्र का प्रदर्शन भी किया गया।गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ल ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल निर्देशन में अन्तर्विभागीय समन्वय के द्वारा जे0ई0/ए0ई0एस0, कोरोना आदि सहित अन्य बीमारियों पर नियंत्रण पाया गया है। उनका जनता के प्रति समर्पण तथा सभी की जान बचाने के लिए उनकी संवेदनशीलता, भावुकता संचारी रोग नियंत्रण अभियान में भी नजर आती है।[/Responsivevoice]