मिट्टी बचाओ अभियान से वर्तमान के साथ भविष्य भी होगा सुरक्षित-योगी

मुख्यमंत्री ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ में सम्मिलित हुए।प्रधानमंत्री ने वर्ष 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को आरम्भ किया,देश में सभी किसानों की आवश्यकता के अनुसार मिट्टी के स्वास्थ्यपरीक्षण के लिए स्वॉयल हेल्थ कार्ड बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।रैली फॉर रिवर्स और मृदा स्वास्थ्य कार्ड यह दोनों ही अभियान उ0प्र0 की भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में उपयोगी साबित हो रहे।देश में प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से मृदा स्वास्थ्य कार्डजारी होने के बाद अब नेचुरल फार्मिंग पर ध्यान केन्द्रित किया गया।इस बार प्रदेश सरकार ने अपने बजट में बुन्देलखण्ड के07 जनपदों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्राविधान किया।गंगा के दोनों तटों पर 05-05 कि0मी0 केदायरे को नेचुरल फार्मिंग के साथ जोड़ा जाएगा।सीसामऊ कानपुर के पास गंगा जी में 14 करोड़ लीटर सीवरेज का पानी गिरताथा, ‘नमामि गंगे परियोजना’ के परिणामस्वरूप आज वहां का जल शुद्ध हो चुका है,प्रयागराज कुम्भ की सफलता में‘नमामि गंगे परियोजना’ का अभूतपूर्व योगदान।वर्ष 2017 में जब सद्गुरु ने ‘रैली फॉर रिवर्स अभियान’ चलाया था, तब प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा और प्रदेश के अन्तर्विभागीय समन्वय के परिणाम स्वरूप नदियों के पुनर्जीवन का कार्यक्रम चला।उ0प्र0 में 60 से अधिक छोटी-बड़ी नदियों के पुनर्जीवन का कार्य किया गया।05 वर्ष में 100 करोड़ वृक्ष लगाने का कार्य उ0प्र0सरकार ने किया, इस वर्ष 35 करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां कानपुर रोड स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में सद्गुरु द्वारा आयोजित ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ में सम्मिलित हुए। उन्होंने कहा कि हम सबके स्वास्थ्य के लिए पृथ्वी और मिट्टी का स्वस्थ होना आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को आरम्भ किया। देश में सभी किसानों की आवश्यकता के अनुसार मिट्टी के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वॉयल हेल्थ कार्ड बहुत ही महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। यहां पर सद्गुरु द्वारा ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ अत्यन्त उपयोगी साबित होगा। उत्तर प्रदेश की भूमि उर्वरा शक्ति से अत्यधिक उन्नत है। भारतीय मनीषा तो वैदिक कालखण्ड से इस बात का उद्घोष करती रही है कि ‘माता भूमिः पुत्रोSहं पृथिव्याः’ अर्थात धरती हमारी माता है और हम सब इसके पुत्र हैं। रैली फॉर रिवर्स और मृदा स्वास्थ्य कार्ड यह दोनों ही अभियान उत्तर प्रदेश की भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में उपयोगी साबित हो रहे हैं। देश के अंदर प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी होने के बाद अब नेचुरल फार्मिंग पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। केन्द्र सरकार पहले ही नेचुरल फार्मिंग के लिए बजट की व्यवस्था कर चुकी है। इस बार प्रदेश सरकार ने अपने बजट में बुन्देलखण्ड के 07 जनपदों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्राविधान किया है। गंगा के दोनों तटों पर 05-05 कि0मी0 के दायरे को नेचुरल फार्मिंग के साथ जोड़ा जाएगा। यह अत्यधिक आवश्यक है कि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम से कम किया जाए और उसकी जगह प्राकृतिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाए।


वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री जी ने गंगा यात्रा के आयोजन की प्रेरणा दी थी। गंगा जी हम सबको विरासत में मिली हुईं एक दैवीय नदी है। गंगा जी की निर्मलता और अविरलता के लिए हम सबको मिलकर कार्य करना चाहिए। सीसामऊ कानपुर के पास गंगा जी में 14 करोड़ लीटर सीवरेज का पानी गिरता था। ‘नमामि गंगे परियोजना’ के परिणामस्वरूप आज वहां का जल शुद्ध हो चुका है। गंगोत्री से गंगा सागर तक ढाई हजार कि0मी0 की यात्रा गंगा जी द्वारा तय की जाती है, लेकिन इस ढाई हजार कि0मी0 में सबसे चिंतापूर्ण हिस्सा कानपुर का था।जाजमऊ में कोई भी जलीय जीव गंगा जी में नहीं बचा था। अब सीसामऊ में सीवरेज का एक बूंद भी पानी नहीं गिरता है। अब जलीय जीव फिर से गंगा जी में दिखायी देते हैं। हमारा सौभाग्य है कि वर्ष 2019 में प्रयागराज कुम्भ में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रयागराज कुम्भ की सफलता में ‘नमामि गंगे परियोजना’ का अभूतपूर्व योगदान रहा। वर्ष 2017 में जब सद्गुरु ने ‘रैली फॉर रिवर्स अभियान’ चलाया था, तब प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा और प्रदेश के अन्तर्विभागीय समन्वय के परिणामस्वरूप नदियों के पुनर्जीवन का कार्यक्रम चला। उत्तर प्रदेश में 60 से अधिक छोटी-बड़ी नदियों के पुनर्जीवन का कार्य किया गया। वर्ष 2017 में प्रदेश के अंदर 38 जनपद ऐसे थे, जो बाढ़ की दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील थी। लाखों हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो जाती थी। जन-धन की हानि होती थी। आज यह समस्या 38 जनपदों से घटकर 03 से 04 जनपदों में सीमित रह गयी है। इस कार्य को और भी अच्छे ढंग से किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 05 वर्ष के अंदर 100 करोड़ वृक्ष लगाने का कार्य उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है। बहुत सारे लोग इस वृक्षारोपण अभियान से जुड़े। इस अभियान में पीपल और बरगद जैसे उपयोगी वृक्षों का रोपण किया गया। इस वर्ष 35 करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसकी तैयारियां अभी से प्रारम्भ हो चुकी हैं। मण्डल स्तर पर जैविक खाद के लिए टेस्टिंग लैब की व्यवस्था की गयी है। वहीं से उत्पाद के विपणन की व्यवस्था भी की जाएगी। यह एक बड़ा अभियान है। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना पड़ेगा। यह उत्तर प्रदेश की धरती मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की धरती है।

उ0प्र0 जैसे विशाल राज्य की बागडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे योग्य व्यक्ति के हाथों में- सद्गुरू


इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सद्गुरु ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की बागडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी जैसे योग्य व्यक्ति के हाथों में है। लोग सोचते थे कि उत्तर प्रदेश में बदलाव नहीं आ सकता, परन्तु आज यहां की परिस्थितियों में अभूतपूर्व बदलाव आया है। उत्तर प्रदेश कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। यहां गंगा बेसिन का सबसे बड़ा भाग मौजूद है। यह सदियों से उत्तर प्रदेश में कृषि के लिए वरदान रहा है। इसकी गोद में सभ्यताओं का विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि कृषि की बेहतरी के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य पर कार्य करना होगा। मिट्टी बचाना ही हमारा पहला उद्देश्य होना चाहिए, जिससे किसानों की उपज बढ़ेगी। किसानों को खेती करने के लिए जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए और रासायनिक उत्पादों से बचना चाहिए। अगर हम रासायनिक उत्पादों को खेतों में डालेंगे तो उसका प्रभाव फसल के साथ-साथ मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा। ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ की शुरुआत सद्गुरु ने इस साल मार्च माह में की थी। वह 27 देशों से होकर गुजरने वाली 100 दिनों की मोटर साइकिल यात्रा पर हैं।इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र, अपर मुख्य सचिव एम0एस0एम0ई0 एवं सूचना नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी0के0 सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।