परिवारवादियों को न पनपने दे जनता-पीएम मोदी

बिना किसी का नाम लिए एक बार फिर विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला प्रधानमंत्री ने,राष्ट्रपति के साथ उनके पैतृक गांव परौंख का भ्रमण कर जनसभा को संबोधित किया प्रधानमंत्री ने हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का गला घोट ता है परिवारवाद ।परिवारवाद को रोकने से ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री बन सकेंगे गरीब के बेटे -बेटी।

कानपुर देहात। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति में परिवारवाद को लेकर बिना किसी का नाम लिए विपक्षी पार्टियों पर एक बार फिर जोरदार हमला बोला। कानपुर देहात स्थित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैतृक गांव परौंख में उनके संग भ्रमण करने के बाद यहां आयोजित जनसभा में पीएम मोदी ने कहा कि परिवारवाद से सावधान रहने की जरूरत है। यह हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का गला घोंटता है। ऐसे में यह हम सबकी और जनता की जिम्मेदारी है कि परिवारवादी न पनपने पाएं। गरीब के बेटा-बेटी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री बन सकें, इसके लिए परिवारवादियों को रोकना बहुत जरूरी है।

पीएम मोदी ने विपक्ष पर प्रहार जारी रखते हुए कहा कि जब वह परिवारवाद के खिलाफ बात करते हैं तो कुछ लोगों को लगता है कि यह राजनीतिक बयान है। वह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ बात कर रहे हैं, ऐसा प्रचार होता है। पर, वह देख रहे हैं कि जो लोग परिवारवाद की उनके व्याख्या में सही बैठते हैं वो उनसे (मोदी से) भड़के हुए हैं, गुस्से में हैं। आज देश के कोने-कोने में ये परिवारदवादी उनके खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। वो इस बात से भी नाराज हैं कि क्यों देश का युवा परिवारवाद के खिलाफ मोदी की बातों को इतनी गंभीरता से ले रहा है। पीएम ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि वे उनकी बात का गलत अर्थ न निकालें, उनकी किसी राजनीतिक दल से या व्यक्ति से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा कि वह चाहते हैं कि मजबूत विपक्ष हो। परिवारवाद के शिकंजे में फंसी पाटियां खुद को इससे मुक्त करें और इसका इलाज करें। तभी भारत का लोकतंत्र मजबूत हेागा। इससे देश के युवाओं को राजनीति में आने का ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह कहकर चुटकी भी ली, “खैर, परिवारवाद पार्टियों से मैं कुछ ज्यादा ही उम्मीद कर रहा हूं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारतीय संविधान और लोकतंत्र की खूबी है कि भारत में गांव में पैदा हुआ गरीब से गरीब व्यक्ति भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच सकता है। लेकिन, आज जब हम लोकतंत्र की इस ताकत की चर्चा कर रहे हैं तो इसके सामने खड़ी परिवारवाद जैसी चुनौतियों से सावधान रहना होगा।


मोदी ने कहा कि लोकतंत्र और गांव की ताकत एक मंच पर,परौंख में आज का यह अवसर बहुत एतिहासिक है। यहां के मंच पर लोकतंत्र और गांव की ताकत एक साथ दिख रही है। यहां इस मंच पर राष्ट्रपति, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित हैं। मुझे भी देशवासियों ने देश सेवा के लिए बड़ा दायित्व सौंपा हैं। हम चारों लोग किसी छोटे गांव या कस्बे से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं। मेरा जन्म भी गुजरात के एक छोटे से कस्बे में हुआ था, गांव की संस्कृति, संस्कार और हमारे यहां जुड़े संघर्षों ने मजबूत किया। यही हमारे लाेकतंत्र की ताकत है।

पूरा हो रहा बाबा साहब का सपना – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि शत प्रतिशत सशक्तिकरण। न कोई भेदभाव न कोई फर्क। यही तो सामाजिक न्याय है। समरसता और समानता का बाबा साहब का सपना था, जिसे आधार बनाकर उन्होंने इस देश को संविधान दिया था। बाबा साहब का वो सपना आज पूरा हो रहा है। देश उस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

गांवों में बसती है भारत की आत्मा – मोदी ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है, क्योंकि गांव हमारी आत्माओं में बसता है। आज जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तो ग्रामीण भारत के लिए हमारे गांवों के लिए, हमारे सपने और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हमारे स्वाधीनता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने भारत की आजादी को भारत के गांव से जोड़कर देखते थे। भारत का गांव जहां आध्यात्म भी हो आदर्श भी हो। भारत का गांव यानी जहां परंपराएं और प्रगतिशीलता भी हो, संस्कार और सहकार भी हो, ममता और समता भी हो। आज आजादी के अमृतकाल में ऐसे ही गांवों का पुनर्गठन पुनर्जागरण करना हमारा कर्त्वय है। इसी संकल्प को लेकर देश गांव गरीब और किसान पंचायती लोकतंत्र के विभिन्न आयामों पर काम कर रहा है। आज भारत के गांवों में सबसे तेज गति सड़कें बन रही हैं और आप्टिकल फाइबर बिछाया जा रहा है।

हमारे भीतर से नहीं निकलता है गांव- मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति श्री कोविंद ने अपने पैतृक आवास को सार्वजनिक कार्य हेतु ग्राम को दे दिया था, जो आज ट्रेनिंग सेंटर बना है। परौंख विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा और देश के सामने ग्रामीण विकास का मॉडल पेश करेगा। उन्होंने कहा कि हम कहीं भी क्यों न पहुंच जाएं, बड़े-बड़े शहरों में क्यों न बस जाएं, अगर हमने अपने गांव को जिया है, तो हमारा गांव हमारे भीतर से कभी नहीं निकलता है। वो हमारी रगों में बस जाता है, वो हमारी सोच में हमेशा रहता है।

एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतीक है पथरी माता मंदिर – पीएम ने मंच से परौंख गांव में अपने भ्रमण की अनुभूतियों को भी साझा किया। कहा कि गांव में भ्रमण के दौरान परौंख में कई आदर्श छवियों को महसूस किया। यहां सबसे पहले उन्हें पथरी माता का आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। ये मंदिर इस गांव की अध्यात्मिक व धार्मिक छवि के साथ एक भारत श्रेष्ठ भारत का भी प्रतीक है। इस मंदिर के लिए राष्ट्रपति के पिताजी ने देश के अलग अलग तीर्थ स्थलों से पत्थर लाकर इसे देव भक्ति के साथ देश भक्ति का भी प्रतीक बना दिया।

परौंख के संस्कार की दुनिया साक्षी– मोदी ने कहा कि परौंख की मिट्टी से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को जो संस्कार मिले हैं उसकी साक्षी दुनिया बन रही है। सर्वोच्च संवैधानिक पद की मर्यादा से बाहर निकलकर उन्होंने मुझे हैरान कर दिया। वह मुझे हेलीपैड पर रिसीव करने आए, मैं बड़ी शर्मिंदगी महसूस कर रहा था। जब मैंने यह बात कही तो उन्होंने कहा कि मैं यहां अतिथि का सत्कार करने आया हूं, मैं गांव के नागरिक के रूप में स्वागत कर रहा हूं। अतिथि देवो भव के संस्कार किस तरह हमारी रगों में पहुंचे हैं उसका उत्तम उदाहरण राष्ट्रपति श्री कोविंद ने पेश किया। पीएम ने कहा कि उन्हें पता चला कि पांचवीं के बाद श्री कोविंद का दाखिला पांच-छह मील दूर स्कूल में करा दिया गया थ तो वो नंगे पांव दौड़ते हुए जाते थे। ये दौड़ सेहत के लिए नहीं बल्कि इसलिए होती थी गर्मी की तपती धरती से पांव में छाले न पड़ें। पांचवीं में पढ़ने वाला बालक स्कूल के लिए तपती धरती पर नंगे पांव दौड़े जा रहा है, जीवन में ऐसा संघर्ष, ऐसी तपस्या इंसान को इंसान बनने में बहुत मदद करती है।

परौंख आना सुखद स्मृति – आज राष्ट्रपति के गांव में आने का अनुभव सुखद स्मृति की तरह है। वह परौंख आने का इंतजार कर रहे थे। आज यहां आकर उनके मन को सुकून मिला और बहुत अच्छा लगा। इस गांव ने राष्ट्रपति का बचपन देखा है और बड़े होने पर हर भारतीय का गौरव बनते भी देखा है। यहां आने से पहले राष्ट्रपति श्री कोविंद ने गांव से जुड़ी कई यादें साझा कीं।