योगी ने जो सीएम बनते कहा वही गहलोत ने अंत में कही..!

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योगी ने जो सीएम बनते कहा वही गहलोत ने अंत में कही..!
योगी ने जो सीएम बनते कहा वही गहलोत ने अंत में कही..!

बदमाशों पर जो बात योगी ने यूपी का सीएम बनते ही कही, वही बात अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल के अंत में कही। तो फिर सीएम गहलोत ने 25 सितंबर 2022 को कांग्रेस विधायकों की बगावत क्यों करवाई..? योगी ने जो सीएम बनते कहा वही गहलोत ने अंत में कही..!

एस.पी.मित्तल

ब जब राजस्थान में दो माह बाद विधानसभा के चुनाव होने है, तब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बदमाशों को आगह किया है कि वे राजस्थान छोड़ दें या फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। 25 अगस्त को जयपुर में प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए गहलोत ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि कोई बदमाश गोली चलाता है तो आपको भी (पुलिस) गोली चलाने की पूरी छूट हे। इसमें कोई दो राय नहीं कि इन दिनों प्रदेश की कानून व्यवस्था का बुरा हाल है। खनन और भूमाफिया पुलिस पर भी हमला करने से नहीं डरते। 23 अगस्त को ही दौसा के सिकंदरा में कांस्टेबल प्रहलाद सिंह के सिर में गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया। बजरी माफिया तो सरकारी अमले पर डंपर व ट्रैक्टर भी चढ़ा रहे हैं। आए दिन नाबालिग बच्चियों के साथ गैंगरेप हो रहे हैं। कहा जा सकता है कि बदमाशों में पुलिस का डर नहीं है। कई मौकों पर तो पुलिस को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा है। अराजकता के ऐसे माहौल में ही सीएम गहलोत ने बदमाशों को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, लेकिन यह चेतावनी बहुत विलंब से दी गइ्र है।

सात साल पहले योगी आदित्यनाथ ने जब मुख्यमंत्री का पद संभाला तो सबसे पहले यही कहा कि अपराधी तत्व यूपी से भाग जाए या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। शुरू में तो बदमाशों ने योगी की इस धमकी को हल्के में लिया, लेकिन जब एनकाउंटर वाले परिणाम सामने आने लगे तो बड़े बड़े बदमाशों ने यूपी छोड़ दिया। आज यूपी में पहले जैसी गुंडई नहीं है। बदमाश यूपी में अपराध करने से डरने लगे हैं। अच्छा होता कि अशोक गहलोत भी पांच साल पहले मुख्यमंत्री बनते ही बदमाशों को ऐसी चेतावनी देते। अब जब बदमाश पुलिस पर पूरी तरह हावी है, तब सीएम ने मजबूरी में पुलिस को गोली चलाने की छूट दी है। सब जानते हैं कि गहलोत ने किस तरह से अपनी सरकार को चलाया है। पुलिस में राजनीतिक दखलंदाजी सबसे ज्यादा गहलोत के कार्यकाल में ही हुई। जिन विधायकों ने गहलोत की सरकार बचाई उनकी सिफारिश पर थानाधिकारी, डीसीपी और एसपी तक नियुक्ति किए गए। जब विधायक और मंत्रियों की सिफारिश पर नियुक्तियां होंगी तो पुलिस पर बदमाश हावी होंगे ही।

—– बगावत क्यों करवाई—–


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें अवसर मिला तो वे कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहेंगे। क्योंकि पार्टी अध्यक्ष का पद मुख्यमंत्री के पद से सौ गुना बड़ा होता है। गहलोत ने यह बात किस नजरिए से कही यह तो वे ही जाने, लेकिन हकीकत यह है कि 25 सितंबर 2022 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने जयपुर में जब कांग्रेस विधायकों की बेठक बुलाई तो मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए गहलोत ने बगावत करवादी। इसे गहलोत की जादूगरी ही कहा जाएगा कि राष्ट्रीय पर्यवेक्षक सीएम के सरकारी आवास पर विधायकों का इंतजार करते रहे और गहलोत ने करीब 80 विधायक कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल के सरकारी आवास पर एकत्रित कर दिए। गहलोत आज कह रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष का पद मुख्यमंत्री से सौ गुना बड़ा है। जबकि सच्चाई यह है कि 25 सितंबर को 80 विधायकों ने लिखित में कहा कि यदि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री के पद से हटाया गया तो हमारा इस्तीफा मान लिया जाए। सामूहिक इस्तीफे का पत्र विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को भी दे दिया। अच्छा होता कि यह बयान देने से पहले सीएम गहलोत 25 सितंबर को हुई अपनी जादूगरी को देख लेते।

सब जानते हैं कि सितंबर 2022 में ही अशोक गहलोत को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय हो गया था। यहां तक कि पार्टी के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष नामांकन की तारीख भी तय हो गई थी। चूंकि गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा रहा था, इसलिए नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए 25 सितंबर को विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। यदि गहलोत को मुख्यमंत्री के पद का लोभ लालच और स्वार्थ नहीं होता तो विधायकों की बगावत नहीं करवाई जाती। अब जब दो माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं और गहलोत को चुनाव के परिणाम भी पता है, तब उन्हें कांग्रेस के अध्यक्ष का पद मुख्यमंत्री से सौ गुना बड़ा नजर आ रहा है। सवाल उठता है कि जिन गहलोत ने सोनिया गांधी के अध्यक्ष रहते हुए विधायकों की बगावत करवाई क्या उन गहलोत को अध्यक्ष बनने का भी अवसर दिया जाएगा? गहलोत माने या नहीं लेकिन 25 सितंबर की बगावत के बाद वे गांधी परिवार से खारिज किए जा चुके हैं। हाईकमान और गांधी परिवार की मजबूरी के चलते ही गहलोत को मुख्यमंत्री बनाए रखा गया है। यदि सितंबर में गहलोत को सीएम के पद से हटाने का निर्णय होता तो गहलोत राजस्थान में कांग्रेस की सरकार भी समाप्त करवा देते। योगी ने जो सीएम बनते कहा वही गहलोत ने अंत में कही..!