दूध-माँ के दूध में फर्क…?

कहावत है कि मां का दूध बच्चों में कभी अंतर नहीं करता, लेकिन हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रिसर्चरों का शोध कुछ और ही कहता है. नर और मादा शिशु को पिलाए जाने वाले दूध में काफी फर्क होता है।

यह एक प्रमाणित तथ्य है कि एक माँ से बढ़कर उसके शिशु का ख्याल कोई दूसरा रख ही नहीं सकता है। जितनी अच्छी तरह से एक माँ अपने शिशु को समझती हैए उससे ज्यादा कोई और समझ ही नहीं सकता है। एक शिशु के लिए उसकी मां का प्रतिपूरक कोई दूसरा बन ही नही सकता है।ठीक उसी प्रकार एक शिशु के लिए उसकी माँ का दूध ही सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ होता है। आजकल बहुत सी महिलाएं अपने शिशु को अपना दूध पिलाना पसंद नहीं करती हैंए परंतुए उनकी इस एक छोटी सी गलती का दुष्प्रभाव उनके शिशु को भुगतना पड़ सकता है। आज कल की महिलाएं अपने शिशु को कृत्रिम रूप से तैयार किये गए दूध को पिलाना पसंद करती है। परंतुए शिशु के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उनका यह अभ्यास बहुत ही गलत है। ऐसी आदत की रोकथाम के लिए उनके लिए यह जानना बहुत ही जरूरी है कि आखिर माँ का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम क्यों है और माँ के दूध और अन्य दूध में क्या फर्क होता है। आइएए आज इस लेख के द्वारा जानते हैं कि माँ के दूध और अन्य दूध में क्या फर्क होता है।माँ का दूध शिशु को कई तरह के रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। माँ के दूध में कई तरह के एंटी बॉडीज़ और ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शिशु को तरह तरह के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने हैं। सिर्फ इतना ही नहींए भविष्य में कई तरह के होने वाले रोगों की संभावना ही समाप्त कर देते हैं। माँ के दूध में पाये जाने वाले ये रोगविरोधी तत्व शिशु के शरीर में पहुंच जाते हैं और तरह तरह के रोगों से शिशु को सुरक्षित रखते हैं। परंतुए यदि शिशु को कोई और दूध पिलाया जाए तो उस दूध में भले भी वही पोषक तत्व मिल जायेए परंतुए रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले वो तत्त्व और एंटी बॉडीज़ मिल ही नहीं सकते हैंए इसका कारण यह है कि इन तत्वों को कृत्रिम तरीके से किसी भी अन्य दूध में डाला ही नही जा सकता है। माँ का दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे कई तरह की बीमारिओं से सुरक्षित रखता है। परंतुए यह क्षमता किसी और दूध में नहीं पाई जा सकती है।

सिर्फ इतना ही नहींए एक और बड़ा अंतर यह भी है कि शिशु माँ के दूध को बड़ी ही आसानी से पचा सकता हैए परंतुए माँ के दूध की तुलना में अन्य किसी भी दूध को पचाना शिशु के कोमल पाचन तंत्र के लिए थोड़ा कठिन होता है। यही एक मुख्य कारण है कि कोई अन्य दूध पीने वाले शिशु को डायरिया और कॉन्स्टिपेशन होने की संभावना बहुत ही अधिक बढ़ जाती हैए जबकि माँ के दूध को पीने वाले शिशुओं में ऐसीसमस्या होने के संभावना कम होती है।

शिशु योग दूध बनाने का घरेलु उपाय

  • आप अपने अनुभव से मलाई हटाकर, या न हटाकर, सीधा उबालकर, ठीक तापमान पर लाकर, बच्चे को पिला सकती हैं। धीरे-धीरे आप स्वयं नियंत्रण रखने, इसे बच्चे की आयु अनुसार पीने के लिए उपयोगी रखना सीख जाएंगी।
  • गाय के दूध में उचित मात्रा में जल मिलाकर इसे पतला कर लें, जिससे अधिक प्रोटीन तथा वसा कम हो जाए। जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, पानी मिलाना घटाते रहें।
  • गाय के दूध में शर्करा डालकर इसे उतना मीठा कर लेते हैं, जितनी इसमें कमी होती है। यह अनुमान से होता है। धीरे-धीरे आप इसकी अभ्यस्त भी हो जाएंगी।

गाय के दूध तथा माँ का दूध में अंतर

  • शिशु की आयु के साथ मां के दूध का संगठन स्वतः बदलता रहता है, जो गाय के दूध में तो नहीं हो सकता।
  • गाय के दूध में प्रोटीन तथा वसा मां के दूध के मुकाबले अधिक होता है।
  • गाय के दूध में उतनी मिठास नहीं होती, जितनी मां के दूध में होती है।
  • जैसे-जैसे बच्चे की आयु बढ़ती जाती है, मां का दूध में प्रोटीन, शर्करा, वसा आदि तत्त्व बढ़ते रहते हैं।