थाइरॉइड की प्रॉब्लम और नुस्खे…

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थाइरॉइड की प्रॉब्लम और नुस्खे…
थाइरॉइड की प्रॉब्लम और नुस्खे…

थाइरॉइड हमारे शरीर की कार्यपद्धति मे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में होने वाली मेटाबॉलिज्म क्रियाओं में थाइरॉइड ग्रंथि से निकलने वाले थाइरॉक्सिन हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मेटाबालिज्म क्रियाओं से ये निर्धारित होता है कि शरीर में बनी ऊर्जा को कब स्टोर किया जाए और कब व कितना यूज या प्रयोग किया जाए। इसीलिए शरीर में उपस्थित थाइरॉइड ग्लैंड में किसी भी तरह की अनियमितता होने पर पूरे शरीर की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। थाइरॉइड की प्रॉब्लम और नुस्खे…

थायराइड विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं-

हाइपरथायरायडिज्म- जब हमारी थायरॉयड ग्रंथि शरीर में बहुत अधिक हार्मोन का उत्पादन करती है, तो थायरॉयड के इस गलत कार्य को हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। इस थायराइड विकार की जटिलताओं, कारणों और उपचारों का उल्लेख नीचे एक अन्य खंड में किया गया है।

हाइपोथायरायडिज्म- जब थायरॉयड ग्रंथि रक्त में कम हार्मोन छोड़ती है, जिसके माध्यम से शरीर में असंतुलन होता है, तो थायरॉयड ग्रंथियों के इस गलत कार्य को हाइपोथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है। इस थायराइड विकार की जटिलता, कारण और इलाज हाइपरथायरायडिज्म से अलग होगा।

थायराइड और थायराइड विकार क्या है…?

थायरॉइड हमारे शरीर की ग्रंथियों में से एक है, जो गले के आसपास और सीधे आदम के सेब के नीचे पाई जाती है। थायराइड चयापचय के उत्पादन और मानव शरीर के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। थायराइड हार्मोन “ट्रायोडोथायरोनिन” (T3) और “थायरोक्सिन” (T4) जारी करता है, और ये हार्मोन रक्त के माध्यम से कोशिकाओं और शरीर के पूरे हिस्से में जाते हैं। थायरॉइड ग्रंथियों का अच्छा कार्य करना हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे शरीर के चयापचय को नियंत्रित करता है। (चयापचय खाए गए भोजन और पेय को ऊर्जा में परिवर्तित करता है) थायरॉइड ग्रंथियों का ठीक से काम न करना हमारे शरीर के संतुलन को बिगाड़ देता है। जब थायरॉयड ग्रंथि शरीर में बड़ी मात्रा में हार्मोन या कम मात्रा में हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर में गंभीर समस्याएं पैदा करती है, और थायरॉयड ग्रंथि के इस गलत कार्य को थायरॉयड विकार या थायरॉयड रोग के रूप में जाना जाता है।

इस ग्रन्थि में अनियमितता होने पर सामान्यत-

हाइपोथाइरॉइडिज्म, हाइपरथाइरॉइडिज्म, गठान होना होने जैसी समस्याएं होती है। अगर आपके साथ भी थाइरॉइड की ग्रंथि की अनियमितता से जुड़ी कोई समस्या हो तो नीचे लिखे प्राकृतिक उपायों को अपनाएं।

थाइरॉइड में अनियमितता के लक्षण

हार्मोनल बदलाव– महिलाओं को पीरियड्स के दौरान थाइरॉइड की स्थिति में पेट में दर्द अधिक रहता है वहीं हाइपरथाइरॉइड में अनियमित पीरियड्स रहते हैं। थाइरॉइड की स्थिति में गर्भ धारण करने में भी दिक्कत हो सकती है।

मोटापा- हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में अक्सर तेजी से वजन बढ़ता है। इतना ही नहीं शरीर में कॉलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है। वहीं हाइपरथाइरॉइड में कॉलेस्ट्रॉल बहुत कम हो जाता है। थकान, अवसाद या घबराहट अगर बिना अधिक मेहनत करने के बाद भी आप थकान महसूस करते हैं या छोटी-छोटी बातों पर घबराहट होती है तो इसकी वजह थाइरॉइड हो सकती है।

मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द– हाइपोथाइरॉडड यानी शरीर में टीएसएच अधिक और टी3, टी4 कम होने पर मांसपेशियों में जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है।

गर्दन में सूजन– थाइरॉइड बढऩे पर गर्दन में सूजन की संभावना बढ़ जाती है। गर्दन में सूजन या भारीपन का एहसास हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

बालों और त्वचा की समस्या- खासतौर पर हाइपोथाइरॉइड की स्थिति में त्वचा में रूखापन, बालों का झडऩा, भौंहों के बालों का झडऩा जैसी समस्याएं होती हैं जबकि हाइपरथाइरॉइड में बालों का तेजी से झडऩा और संवेदनशील त्वचा जैले लक्षण दिखते हैं।

पेट खराब होना लंबे समय तक– कान्सटिपेशन की समस्या हाइपोथाइरॉइड में होती है जबकि हाइपरथाइरॉइड में डायरिया की दिक्कत बार-बार होती है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा सबसे चमत्कारी दवा के रूप में कार्य करता है।
अश्वगंधा का सेवन करने से थाइरॉइड की अनियमितता पर नियंत्रण होता है।
साथ ही कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
अश्वगंधा के नियमित सेवन से शरीर में भरपूर ऊर्जा बनी रहती है साथ ही कार्यक्षमता में भी वृद्धि होती है।

समुद्री घास

समुद्री घास को भी थाइरॉइड ग्रंथि को नियमित बनाने के लिए एक रामबाण दवा की तरह काम करती है।
समुद्री घास के सेवन से शरीर को मिनरल्स व आयोडिन मिलता है।
इसीलिए समुद्री घास का सेेवन इस बीमारी मे लाभदायक है।
इसके अलावा इससे मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंस स्किन को जवान बनाएं रखते हैं।

नींबूं की पत्तियां-

नींबू की पत्तियों का सेवन थाइरॉइड को नियमित करता हैं।
दरअसल मुख्य रूप से इसका सेवन थाइरॉक्सिन के अत्याधिक मात्रा में बनने पर रोक लगाता है। इसकी पत्तियों की चाय बनाकर पीना भी इस बीमारी में रामबाण औषधि का काम करती है।

ग्रीन ओट्स-

थाइरॉइड में ग्रीन ओट्स एक नेचुरल औषधि की तरह कार्य करता है।
ये शरीर में हो रही थाइरॉक्सिन की अधिकता व उसके कारण हो रही समस्याओं को मिटाता है। थाइरॉइड की प्रॉब्लम और नुस्खे…