क्या राजस्थान में सचिन पायलट का अभिषेक होने देंगे गहलोत…?

क्या राजस्थान में सचिन पायलट का अभिषेक होने देंगे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत…?आखिर पायलट ने गहलोत को पिता तुल्य क्यों बताया…? युवा नेतृत्व के लिए सीएम अशोक गहलोत ने अशोक चांदना, कृष्ण पूनिया और सीताराम लांबा के नाम गिनाए।

अशोक गहलोत खुद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद सौंपे-आचार्य प्रमोद कृष्णम

एस0 पी0 मित्तल

प्रतिद्वंदी नेता सचिन पायलट ने अपने निर्वाचन क्षेत्र टोंक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेकर जो बयान दिया, उससे राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं होने लगी हैं। पायलट ने कहा कि गहलोत ने मुझे नकारा और निकम्मा तक कहा, लेकिन मैं बुरा नहीं मानता क्योंकि अशोक गहलोत मेरे पिता तुल्य हैं। गांधीवादी तो गहलोत को माना जाता है, लेकिन पायलट तो गहलोत से भी ज्यादा स्वयं को महात्मा गांधी का अनुयायी दर्शाने में लगे हैं। पायलट ने गहलोत को पिता तुल्य तब कहा है जब पिछले एक सप्ताह में गहलोत ने दो बड़े हमले पायलट पर किए। महाराष्ट्र के सियासी संकट पर गहलोत ने कहा कि जुलाई 2020 में तो राजस्थान में 10-10 करोड़ रुपए बंट भी गए थे। यानी जुलाई 2020 में पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के जो 18 विधायक दिल्ली गए, उन्हें भाजपा की ओर से 10-10 करोड़ रुपए दिए गए। इसी प्रकार सीकर के एक समारोह में गहलोत ने पायलट पर भाजपा से मिली भगत होने का आरोप लगाया। यूं तो पायलट पिछले साढ़े तीन वर्ष से ही गहलोत के कटाक्ष सहन कर रहे हैं, लेकिन यह पहला अवसर रहा कि पायलट ने गहलोत की तुलना जन्म देने वाले अपने पिता स्वर्गीय राजेश पायलट से की। जानकारों का मानना है कि गांधी परिवार से ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही सचिन पायलट गहलोत को पिता समान मान रहे हैं। विगत दिनों भी यह चर्चा हुई थी कि गहलोत को हटाकर पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जार हा है। जब इस चर्चा ने ज्यादा जोर पकड़ा तो खुद अशोक गहलोत को सफाई देने पड़ी। गहलोत का कहना रहा कि मुख्यमंत्री बदलने की खबरों से नौकरशाही भी सरकार का कहना मानना बंद कर देती है। इससे सरकार के काम काज पर प्रतिकूल असर पड़ता है। लेकिन अब एक बार फिर मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा जोर पकडऩे लगी है।

प्रियंका गांधी के सहयोगी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने पायलट समर्थक एक कार्यक्रम के ट्वीट पर रीट्वीट कर लिखा है कि विष पीने वाले नीलकंठ महादेव का अभिषेक श्रावण माह की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही है। यह मास 12 अगस्त तक चलेगा। यानी 14 जुलाई से 12 अगस्त के बीच मुख्यमंत्री के पद पर पायलट का अभिषेक (शपथ) हो जाएगा। आचार्य प्रमोद कृष्णम प्रियंका गांधी के सहयोगी होने के साथ साथ ज्योतिष के ज्ञाता भी हैं। पायलट का अभिषेक कब होगा, यह तो भगवान शंकर ही जानते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि क्या अशोक गहलोत, पायलट का अभिषेक होने देंगे? जो लोग हलोत की राजनीति को जानते हैं, उन्हें पता है कि गहलोत कांग्रेस में यूं ही निवेश नहीं करते हैं। उदयपुर में राष्ट्रीय चिंतन शिविर, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के तीनों उम्मीदवारों की जीत तथा राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के दौरान दिल्ली में डेरा डाल कर अशोक गहलोत ने कांग्रेस और गांधी परिवार में जो राजनीतिक निवेश किया है, उसे बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। यह तीनों काम गहलोत ने गांधी परिवार की हौंसला अफजाई के लिए किए हैं। जब गहलोत इतनी हौंसला अफजाई कर रहे हैं, तब गांधी परिवार गहलोत को मुख्यमंत्री के पद से कैसे हटा सकता है? सचिन पायलट के समर्थक माने या नहीं, लेकिन गहलोत ने गांधी परिवार को समझा रखा है कि राजस्थान में वे ही कांग्रेस की सरकार चला सकते हैं। राजस्थान में डेढ़ वर्ष बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सरकार कभी रिपीट नहीं हुई। 2013 में तो गहलोत को सीएम रहते कांग्रेस को मात्र 21 सीटें मिली। पायलट सही कह रहे हैँ कि 2013 से 2018 के बीच भाजपा शासन में उन्होंने जो संघर्ष किया उसी का परिणाम है कि प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिला। लेकिन फिर भी गहलोत कहते हैं कि पायलट की रगड़ाई नहीं हुई। सवाल यह भी है कि श्रावण मास में अभिषेक नहीं हुआ तो सनिच पायलट का क्या होगा? क्या फिर भी पायलट, गहलोत को पिता तुल्य मानते रहेंगे? सवाल यह भी है कि क्या शांति धारीवाल, रघु शर्मा, प्रताप सिंह खाचरियावास, गोविंद सिंह डोटासरा, महेश जोशी जैसे गहलोत समर्थक सनि पायलट को मुख्यमंत्री के तौर पर स्वीकार करेंगे? पायलट भले ही गहलोत को पिता तुल्य कहे, लेकिन अभिषेक के बाद गहलोत कभी भी पायलट को अपने बेटे के समान नहीं मानेंगे?

मुख्यमंत्री पद सौंपे-

सचिन पायलट के लिए श्रावण मास में अभिषेक का ट्वीट करने वाले कांग्रेस के नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने 28 जून को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री का पद पायलट को सौंप देना चाहिए। मौजूदा समय में गहलोत की राष्ट्रीय राजनीति में सख्त जरुरत है। उन्होंने कहा कि गहलोत एक अनुभवी राजनेता है और उनका देशभर में सम्मान है। यदि गहलोत अभी से ही रणनीति बनाएंगे तो 2024 के लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस को जीत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि जब कांग्रेस में युवा नेतृत्व को आगे लाया जाए।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीन नाम गिनाए-

सचिन पायलट के रूप में युवा नेतृत्व को आगे लाने की राजनीतिक खबरों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के तीन युवाओं नेताओं के नाम गिना दिए हैं। 28 जून को जयपुर में राजीव गांधी एक्सीलेंस सेंटर के शिलान्यास समारोह में गहलोत ने कहा कि मैं हमेशा युवाओं को आगे बढ़ाने का काम करता हंू। लेकिन ऐसे युवाओं को आगे आना चाहिए जिनके मन में देश सेवा करने का का जज्बा हो। गहलोत ने कहा कि इस समारोह में खेल मंत्री अशोक चांदना, राजस्थान खेल परिषद की अध्यक्ष कृष्ण पूनिया और खेल बोर्ड के अध्यक्ष सीताराम लांबा भी बैठे हैं। इन तीनों नेताओं ने युवाओं का नेतृत्व करने की क्षमता है। गहलोत ने कहा कि मेरी सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि युवाओं को आगे बढ़ाया जावे। इसीलिए अब तक 200 खिलाडिय़ों को नौकरी दी गई है। 200 युवाओं को विदेश में पढ़ाई का खर्चा राज्य सरकार उठाएगी। इतना ही नहीं डेढ़ हजार विद्यार्थियों की कोचिंग का खर्चा भी सरकार उठाएगी। दिल्ली के उदयपुर हाउस में यूथ हॉस्टल बनाया जा रहा है जिसमें पांच सौ युवा रहकर कोचिंग कर सकेंगे। इस हॉस्टल पर 300 करोड रुपए खर्च होंगे। गहलोत ने कहा कि उनके तीन वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश में 211 नए कॉलेज खोले गए, इनमें से 90 कॉलेज छात्राओं के लिए है।

ग्रामीण क्षेत्र की जिस सरकार स्कूल ने पांच सौ छात्राएं हैं, उन्हें कॉलेज में क्रमोन्नत किया जा रहा है। गहलोत ने खेल मंत्री चांदना से कहा कि वे देश के विभिन्न राज्यों में चल रही युवाओं की स्कीमों का अध्ययन करवाएं और फिर एक रिपोर्ट मुझे प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान में भी युवाओं के लिए योजनाएं लागू की जाएंगी। जयपुर में चल रहे कोविड स्वास्थ्य सहायकों के बेमियादी धरने की ओर इधार करते हुए गहलोत ने कहा कि कुछ लोग बेवजह धरना प्रदर्शन करते हैं, जबकि उनकी सरकार में अब तक एक लाख युवाओं को सरकारी नौकर दी है तथा तीन लाख नौकरियों की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में युवाओं को धरना प्रदर्शन करने के बजाए प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेकर नौकरी प्राप्त करनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है। मेरा एक एक क्षण गरीब की सेवा के लिए व्यतीत हो रहा है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान की सरकारी नौकरियों में सिर्फ राजस्थान के युवाओं को ही भाग लेने दिया जाए, यह मांग लंबे समय से चली आ रही है। कुछ राज्यों में अपने यहां ऐसे कानून भी बना लिए हैं। लेकिन मुझे बताया गया कि ऐसे कानून सुप्रीम कोर्ट की भावना के खिलाफ है। गहलोत ने कहा कि जिन राज्यों में अपने ही प्रदेश के युवाओं को नौकरी देने का निर्णय लिया है उन राज्यों के कानूनों की समीक्षा की जा रही है। यदि कोई वैधानिक अड़चन नहीं आई तो राजस्थान में भी ऐसा कानून बनाकर प्रदेश के युवाओं को ही सरकारी नौकरी दी जाएगी।