योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

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योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार
योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

के.डी. मिश्रा

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है। यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है।

सूर्य आज भी एक रहस्य है। यह हमारे सूक्ष्म शरीर को अपनी चैतन्य शक्ति से जीवंतता प्रदान करता है। प्राचीनकाल में ही हमारे ऋषि मुनियो ने रहस्य को समझ लिया था और इसके उपयोग की कला को आमजन के कल्याण के लिए प्रतिपादित किया था। सूर्य देव को आधर्य अर्पित प्रचलन आदिकाल से चला आ रहा है क्योंकि यह जीवनदायनी ऊर्जा का स्त्रोत है इसलिए सूर्य नमश्कार किया जाता है । प्राचीनकाल से ही सूर्य नमस्कार की गणना योगासन तथा व्यायाम दोनों में की गई है। योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ है सूर्य को नमन जीवनदायिनी ऊर्जा महा पुंज को नमस्कार सूर्य नमस्कार सूर्य के प्रति सम्मान प्रकट करने की एक प्राचीन विधि है। सूर्य नमस्कार में आसन प्राणायाम ध्यान चक्र जागरण और मंत्रोचार की क्रियाएं सम्मिलित होने से यह अपने आप में एक पूर्ण साधना है। वैसे तो सूर्य नमस्कार का प्रादुर्भाव एक रहस्य है फिर भी इसे वैदिक काल के मनीषियों आत्म ज्ञानियों द्वारा स्वास्थ्य रक्षा के लिए विकसित की गई। एक पद्धति माना जाता है वर्तमान में इसके चमत्कारिक आसन अत्यधिक लोकप्रिय हो रहे हैं ।सूर्य नमस्कार में आसन प्राणायाम ध्यान चक्र जागरण और मंत्रोच्चारण की क्रियाएं सम्मिलित होने से यह अपने आप में एक पूर्ण साधना है।

सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। आजकल बच्चे प्रतिस्पर्धा का सामना करते है। इसलिए उन्हे प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। यह मांसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है और हमारे भविष्य के खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और अंगो के लचीलेपन को बढ़ता है। 5 वर्ष तक के बच्चे नियमित सूर्य नमस्कार करना प्रारंभ कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही इंसाना को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है। इसके अभ्यास से मानव का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है। ‘सूर्य नमस्कार’ स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है। योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार के लाभ


सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। यह अकेला अभ्यास ही हमारे सम्पूर्ण शरीर का व्यायाम करा देता है। इसके दैनिक अभ्यास से हमारा शरीर निरोगी, स्वस्थ और चेहरा ओजपूर्ण हो जाता है। महिलायें हों या पुरुष, बच्चे हों या वृद्ध, सूर्य नमस्कार सभी के लिए बहुत लाभदायक होता है। सूर्य नमस्कार से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर शरीर के सभी अंगो के लिए बहुत से लाभ हैं। सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक शरीर के सभी अंगो को बहुत लाभान्वित करता है। यही कारण है कि सभी योग विशेषज्ञ इसके अभ्यास पर विशेष बल देते हैं। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से शरीर, मन और आत्मा सबल होते हैं। पृथ्वी पर सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है। सूर्य नमस्कार के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक कई लाभ हैं।

सूर्य नमस्कार करने से आप बनते हैं स्वस्थ और हृष्ट- पुष्ट – सूर्य नमस्कार न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमारे पूरे शरीर के आतंरिक और बाहरी अंगों को स्वस्थ और निरोगी बनाए रखते हैं।

बेहतर होता है पाचन तंत्र- सूर्य नमस्कार के आसान हमारे पेट के आतंरिक भाग को मज़बूत बनाए रखने में सहायता करते हैं। यदि आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार कर रहे हैं तो आपका पाचन तंत्र मज़बूत रहता है और पेट से सम्बन्धित बीमारियाँ आपको तंग नहीं करतीं।

सूर्य नमस्कार करने से पेट की चर्बी घटती है – जो लोग दिन- रात गूगल पर केवल अपने पेट की चर्बी कम करने की तरकीबें ढूंढते रहते हैं, उनके लिए एक खुशखबरी है। आज ही सूर्य नमस्कार को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें, आप पाएंगे कि कुछ दिन में ही आप अपने ही सपनों के राजकुमार या राजकुमारी से भी फिट दिखने लगेंगे।

शरीर को डीटॉक्स करता है सूर्य नमस्कार – हमारा शरीर, आये दिन के तनाव और जीवन शैली के बदलाव के कारण टॉक्सिंस इकठ्ठा करता रहता है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास हमारे शरीर के अनचाहे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलने में हमारी मदद करता है।

मन की हर चिंता और तनाव को आपसे दूर रखता है सूर्य नमस्कार – सूर्य नमस्कार न केवल हमें शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रखता है बल्कि मानसिक रूप से भी चिंतामुक्त और तनावमुक्त बनाए रखता है। सूर्य नमस्कार के 12 आसन हमें दिन भर तारो ताज़ा अनुभव करने में हमारी मदद करते हैं।

शरीर में लचीलापन चाहिए तो सूर्य नमस्कार है कुंजी – सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक व्यायाम है। अलग-अलग आसन, शरीर के अलग-अलग अंगों पर अपना प्रभाव डालते हैं । जब हम एक आसन से दूसरे आसन में जाते हैं तो व्यायाम की निरंतरता बनी रहती है और हमारे शरीर के सभी अंगों में लचीलापन और दृढ़ता आती है। अगर आप प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं तो आप पायेंगे कि आपके शरीर में अकड़न नहीं रहती और आप अपने आपको अधिक लचीला अनुभव करते हैं। योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

मासिक-धर्म करना है नियमित, तो रोज़ करें सूर्य नमस्कार – जो महिलायें अपने मासिक धर्म में अनियमितता से परेशान हैं, सूर्य नमस्कार आपके लिए बहुत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। नियमित सूर्य नमस्कार पेट के निचले हिस्से, नितम्ब, गर्भाशय (यूट्रस) और अंडाशय (ओवरी) को स्वस्थ बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता की समस्य को जड़ से दूर करता है।

स्वास्थ्य के प्रति सचेत महिलाओं के लिए यह एक वरदान है। इससे आप न केवल अतिरिक्त कैलोरी कम करते है बल्कि पेट की मांसपेशियो के सहज खिचाव से बिना खर्चे सही आकार पा सकते हैं। सूर्य नमस्कार के कई आसन कुछ ग्रंथियो को उत्तेजित कर देते हैं, जैसे कि थाईरॉइड ग्रंथि (जो हमारे वजन पर ख़ासा असर डालती है) के हॉर्मोन के स्राव को बढ़ाकर पेट की अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद करते हैं। सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास महिलाओं के मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करता है और प्रसव को भी आसान करता है। साथ ही ये चेहरे पर निखार वापस लाने में मदद करता है, झुर्रियों को आने से रोकता है और हमे चिरयुवा और कांतिमान बनाता है।

सूर्य नमस्कार से अंतर्दृष्टि (इंट्यूशन) विकसित होती है – सूर्य नमस्कार व ध्यान के नियमित अभ्यास से मणिपुर चक्र बादाम के आकार से बढ़कर हथेली के आकार का हो जाता है। मणिपुर चक्र का यह विकास जो कि हमारा दूसरा मस्तिष्क भी कहलाता है, हमारी अंतरदृष्टि विकसित कर हमें अधिक स्पष्ट और केंद्रित बनाता है। मणिपुर चक्र का सिकुड़ना अवसाद और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों की ओर ले जाता है।सूर्य नमस्कार के ढेरों लाभ हमारे शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखते हैं, इसीलिए सभी योग विशेषज्ञ सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास पर विशेष बल देते हैं।

रीढ़ की हड्डी को मिलती है मजबूती- सूर्य नमस्कार से रीढ़ की हड्डी की निचले भाग से लेकर उपरी भाग तक पूरी रीढ़ की हड्डी का बढ़ियाँ व्यायाम होता है। इससे आपकी रीढ़ की हड्डी को लचीलापन और मजबूती दोनों मिलते हैं ।

बच्चों में एकाग्रता बढ़ाता है सूर्य नमस्कार – सूर्य नमस्कार मन शांत करता है और एकाग्रता को बढ़ाता है। आजकल बच्चे प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं इसलिए उन्हे नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ती है और परीक्षा के दिनों की चिंता और असहजता कम होती है। सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से शरीर में शक्ति और ओज की वृद्धि होती है। यह माँसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है और हमारे भविष्य के खिलाड़ियों के मेरुदण्ड और अंगो के लचीलेपन को बढ़ता है। 5 वर्ष तक के बच्चे नियमित सूर्य नमस्कार करना प्रारंभ कर सकते हैं।

योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार करने से लाभ

  • वजन कम करने में मदद करता है।
  • शरीर को लची बनाता है।
  • शारीरिक और मानसिक मजबूती बढ़ाता है।
  • बॉडी पोस्चर को बेहतर करता है और बैलेंस बनाने में मदद करता है।
  • मसल्स (muscles) को टोन (tone) करता है और हड्डियों को मजबूत करता है।
  • बाजू, कंधे, कमर, पैर, काफ़्स और हिप्स की मांसपेशियों को टोन करता है।
  • सूर्य नमस्कार से विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • शरीर में खून का प्रवाह तेज होता है जिससे ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है।
  • सूर्य नमस्कार का असर दिमाग पर पडता है और दिमाग ठंडा रहता है।
  • क्रोध पर काबू रखने में मददगार होता है।
  • हृदय व फेफडोंकी कार्यक्षमता बढती है।
  • कशेरुक व कमर लचीली बनती है।
  • मनकी एकाग्रता बढती है।
  • यह शरीर के सभी अंगों, मांसपेशियों व नसों को क्रियाशील करता है।
  • पाचन सम्बन्धी समस्याओं, अपच, कब्ज, बदहजमी, गैस, अफारे तथा भूख न लगने जैसी समस्याओं के समाधान में बहुत ही उपयोगी भूमिका निभाता है।
  • वात, पित्त तथा कफ को संतुलित करने में मदद करता है। त्रिदोष निवारण में मदद करता है।
  • इसके अभ्यास से रक्त संचालन तीव्र होता है तथा चयापचय की गति बढ़ जाती है, जिससे शरीर के सभी अंग सशक्त तथा क्रियाशील होते हैं।
  • इसका नियमित अभ्यास करने वाले व्यक्ति को हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, कब्ज जैसी समस्याओं के होने की आशंका बेहद कम हो जाती है।
  • मानसिक तनाव, अवसाद, एंग्जायटी आदि के निदान के साथ क्रोध, चिड़चिड़ापन तथा भय का भी निवारण करता है।

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सूर्य नमस्कार में 12 आसन हैं प्रतेक आसान के अलग-अलग फायदे-


सूर्य नमस्कार शरीर के अलग-अलग अंगों के लिए फायदेमंद है। जब आप इसके अलग-अलग आसनों को करते हैं तो इससे अलग-अलग फायदा मिलता है।सूर्य नमस्कार सिर से लेकर पैर तक, कई अंगों के लिए फायदेमंद है। दरअसल, यह संपूर्ण शारीरिक प्रणाली के लिए एक व्यापक कसरत है जिसे बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। दरअसल, हमारे शरीर में सौर जाल होता है जो कि पेट के गड्ढे में स्थित विकिरण तंत्रिकाओं का एक नेटवर्क है और सूर्य से जुड़ा हुआ माना जाता है। नतीजतन, लगातार सूर्य नमस्कार अभ्यास सौर जाल के आकार को बढ़ाता है, जो रचनात्मकता, अंतर्ज्ञान, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व में सुधार करता है।

योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार करने की विधि-

  • योग मैट पर प्रणामासन की मुद्रा में खड़े हो जाएं।
  • सांस खींचते हुए हस्त उत्तानासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए हस्त पादासन की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस खींचते हुए अश्व संचालनासन की मुद्रा में आ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए दंडासन की स्थिति पर आ जाएं।
  • इसी स्थिति को 5 सांसों तक रोककर रखें।
  • सांस खींचते हुए अष्टांग नमस्कार की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए भुजंगासन की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस खींचते हुए अधोमुख श्वानासन की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए अश्व संचालनासन की स्थिति में आएं।
  • सांस खींचते हुए हस्त पादासन की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए हस्त उत्तानासन की स्थिति में आ जाएं।
  • सांस खींचते हुए ताड़ासन की स्थिति में आ जाएं।

  1. प्रार्थना मुद्रा (प्राणासन)– एक योगा मैट लें और पहले इस पर सामने सीधे खड़े हो जाएं। फिर अपने पैरों को एक साथ लाएं, और अपनी बाहों को अपनी तरफ आराम से रखें।अपनी आंखें बंद करें और अपने हाथों की हथेलियों को अपनी छाती के बीच में एक साथ लाएं। सांसों पर ध्यान दें और अपने पूरे शरीर को आराम दें।

प्राणासन करने के फायदे

रोज सुबह उठकर करेंगे सूर्य नमस्कार तो शरीर के एक-एक अंग को मिलेगा फायदा, जानें अभ्यास का सही तरीका स्ट्रेस को दूर भगाने के लिए करें इन 2 योगासनों की प्रैक्टिस,स्लीपिंग डिसॉर्डर्स भी होगें कम शरीर के एक-एक अंग को जोश से भर देगा सूर्य नमस्कार।प्राणासन करने से तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिलती है।ये पहले तो तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करता है। ये दिमाग को शांत करता है और कंसंट्रेशन बढ़ाने मेंमदद करता है।

  1. हस्त उत्तानासन- हस्त उत्तानासन शुरू करने के लिए गहरी सांस लें और छोड़ें। इसके बाद गहरी सांस लें और अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर और आगे की ओर फैलाएं। ऊपर देखें और अपने शरीर को थोड़ा पीछे की ओर बढ़ाने के लिए अपने पैरों को आगे की ओर बढ़ाएं। जब आप पीछे की ओर झुकते हैं, तो सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करें और जब आप आगे झुकें, तो सांस लेने पर ध्यान दें।

हस्त उत्तानासन के फायदे – ये आसन शरीर की टोनिंग करने में मददगार है। ये पेट की मांसपेशियों को स्ट्रेच और टोन करता है। ये आसान पेल्विक हिस्से को मजबूती देता है। एड़ी से लेकर उंगलियों के सिरे तक इस योग से पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती है।

  1. हस्तपादासन- हस्तपादासन करने के लिए अपने घुटनों को आगे और नीचे मोड़ना शुरू करें, ऐसा करते समय अपनी रीढ़ को स्ट्रेच करें। अपने हाथों को फर्श पर रखें, केवल आपकी उंगलियां सतह से संपर्क करें। बस अपने घुटनों को इतना मोड़ें कि आपकी छाती आपकी जांघों पर टिकी रहे और आपका सिर आपके घुटने पर टिका रहे। कुछ सेकंड के लिए इसी स्थिति में रहें।

हस्तपादासन के फायदे- यह हैमस्ट्रिंग को स्ट्रेच करते हुए पैरों, कंधों और बाहों की मांसपेशियों को भी खोलता है। यह शरीर में लचीलापन लाता है और पीठ दर्द व कंधे का दर्दआदि से बचाव में मदद करता है।

  1. अश्व संचालनासन- अश्व संचालनासन करने के लिए अपने दाहिने पैर को पीछे ले जाएं, केवल घुटने को नीचे रखें। अपने पैर को फर्श पर सपाट रखते हुए अपने बाएं घुटने को मोड़ें। अपनी उंगलियों या हथेलियों को फर्श पर रखें, अपने कंधों को पीछे की ओर घुमाएं और धीरे से अपना सिर उठाएं।

अश्व संचालनासन के फायदे- अश्व संचालनासन करने से पैर और रीढ़ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। ये पेट की समस्याओं को ठीक करने में मददगार है। इसे करने से अपच और कब्ज की समस्या दूर होती है।

  1. पर्वतासन- पर्वतासन करने के लिए धीरे-धीरे सांस छोड़ें, अपनी हथेलियों को फर्श पर लाएं और अपने कूल्हों को ऊपर उठाएं। बाएं पैर को दाईं ओर पीछे ले जाएं। अपनी रीढ़ को चौड़ा करते हुए अपने कंधों को अपनी टखनों की ओर लाएं। एक-दो गहरी सांस अंदर और बाहर लें।

पर्वतासन के फायदे — यह आसन मन को शांत करने में मदद करता है। ये फैट बर्म करता है और शरीर की चर्बी पचाता है। इस आसन को करने से मांसपेशियों का दर्द दूर होता है। ये शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सही करता है और फेफड़ों को मजबूती देता है।

  1. अष्टांग नमस्कार- सास छोड़ते हुए अपने घुटनों को नीचे करें और अपने सिर को फर्श पर आगे की ओर दबाते हुए धीरे से नियंत्रित छाती के साथ नीचे आएं। जैसे कि हम भगवान को प्रणाम कर रहे हों। अधिक मजबूती के लिए अपनी कोहनियों को भी नीचे दबाते हुए ध्यान से रखें।

अष्टांग नमस्कार के फायदे- अष्टांग नमस्कार इम्यूनिटी बूस्टर है और शरीर को मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करता है। यह पीठ और रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बढ़ाता है। पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इस एक ही पोजीशन को करने से आपके शरीर के सभी आठ अंगों को फायदा मिलता है।

  1. भुजंगासन – भुजंगासन करने के लिए अपने हाथ और पैर एक ही जगह पर रखें। साथ ही श्वास लें। आगे की ओर सरकें और अपनी छाती को ऊपर उठाएं। अपने कंधों को पीछे की ओर घुमाते हुए अपनी कोहनियों को एक-दूसरे की ओर वापस दबाएं। धीरे से ऊपर देखें।

भुजंगासन के फायदे – ये शरीर का लचीलापन बढ़ाता है और मूड को बेहतर बनाता है। यह एक साथ कंधों, छाती, पीठ और पैरों की मांसपेशियों को फैलाता है। तनाव और थकान को दूर करता है और हृदय स्वस्थ के लिए भी फायदेमंद है। साथ ही वेट लॉस में भी इसे करना फायदेमंद है।

  1. अधो मुख श्वानासन- अधो मुख श्वानासन को कोबरा पोज भी कहते हैं। इस पोज में अपने हाथों और पैरों को फर्श पर रखते हुए अपनी कमर और कूल्हों को ऊपर उठाएं। आपके शरीर को एक ‘उल्टे V आकार’ बनाना चाहिए। अपने हाथों को उसी स्थिति में रखते हुए अब अपने पैरों को आगे की ओर ले जाएं और मुद्रा में गहरे उतरें।

अधो मुख श्वानासन के फायदे– इसे करने से रीढ़ की हड्डी को मजबूती मिलता है। यह रीढ़ की हड्डी के क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन को सही करता है। यह महिलाओं को मेनोपॉज के लक्षणों से निपटने में मदद करता है।

  1. दंडासन- अपने दाहिने पैर को पीछे की ओर लाएं और अपने ऊपरी शरीर को अपनी दोनों हथेलियों पर संतुलित करें। आपका शरीर छड़ी की तरह सीधा होना चाहिए। आपके पैर की उंगलियां चटाई पर होनी चाहिए। सुनिश्चित करें कि आपकी बाहें फर्श की तरफ सीधी हो।

दंडासन के फायदे– दंडासन कंधे और छाती को मजबूत बनाने में मददगार है। ये शरीर की मुद्रा में सुधार लाता है। ये पीठ की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। शरीर की मुद्रा में सुधार लाता है। एकाग्रता बढ़ाने में मददगार है।

  1. हस्तपादासन- हस्तपादासन करने के लिएपहले सांस छोड़ें और पैरों को एक साथ खींचे, दाहिने पैर को सामने रखें। बस अपने घुटनों को इतना मोड़ें कि आपकी छाती आपकी जांघों पर टिकी रहे और आपका सिर आपके घुटने पर टिका रहे।

हस्तपदासन के फायदे- इसे करने से अनिद्रा दूर होती है। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में इसे करना अच्छा है।सिरदर्द में ये फायदेमंद है। ये चिंता और एंग्जायटी की स्थिति में फायदेमंद है।

  1. हस्त उत्तानासन- हस्त उत्तानासन करने के लिए एक गहरी सांस लें और अपनी बाहों को अपने सिर के ऊपर और ऊपर की ओर फैलाएं। ऊपर देखें और अपने शरीर को थोड़ा पीछे की ओर बढ़ाने के लिए अपने पेल्विक हिस्से को आगे की ओर दबाएं। गहरी सांस छोड़ें।

हस्त उत्तानासन के के फायदे- इसे करने से शरीर की आलस दूर होती है। यह अस्थमा, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और थकान जैसी बीमारियों में फायदेमंद है।यह पाचन में भी मदद करता है। छाती का विस्तार करता है, जिसके कि शरीर में ऑक्सीजन का सर्कुलेशन सही रहता है।

  1. ताड़ासन- ताड़ासन करने के लिएसांस छोड़ें और प्रार्थना की मुद्रा में आ जाएं। अपनी बाहों को धीरे-धीरे और लगातार नीचे करें और इसी तरह कुछ ठहर जाएं।

ताड़ासन के फायदे- जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण विकसित करने में मदद करता है। कूल्हों, पेट और दूसरी मांसपेशियों को टोन करता है।

जब सभी 12 पद पूरे हो जाते हैं, तो सूर्य नमस्कार का एक चक्र पूरा हो जाता है। औसतन प्रतिदिन 12-15 चक्र करने से आपको वे सभी लाभ मिलेंगे जिनकी आपके शरीर को जरूर है, जिससे आप फिट और स्वस्थ रहेंगे।सूर्य नमस्कार को आधुनिक समय की योगाभ्यास का एक हिस्सा माना जाता है, हालांकि इसे न तो आसन माना जाता था और न ही पारंपरिक योग का हिस्सा । नियमित गतिविधियां शुरू करने से पहले सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने से अभ्यासी सक्रिय हो जाता है और एक पूर्ण ऊर्जावान दिन देता है। सूर्य नमस्कार अभ्यास में कुल 12 आसन होते हैं और एक चक्र में 24 चरण होते हैं । यह सूर्य देव के बारह नामों के जाप के साथ “सूर्य” को नमस्कार के रूप में है। हम प्रकाशित शोध के आधार पर शरीर के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक पहलुओं पर इसके प्रभावों को उजागर करते हुए सूर्य नमस्कार के महत्व पर जोर देते हैं । इसके अलावा, पूरे शरीर के लिए एक पूर्ण साधना के रूप में सूर्य नमस्कार की उपयोगिता पर बल दिया जाता है।